shashi tharoor criticizes america: अमेरिका ने अपनी सैन्य कमांड के नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाकर उसे पुराना नाम ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ दिया है, जिस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘क्वाड’ के ताबूत में आखिरी कील बताया है.

shashi tharoor criticizes america: अमेरिका के रक्षा विभाग ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है जिसने सबको चौंका दिया है. अमेरिका ने अपनी मिलिट्री की ‘यूएस इंडो पैसिफिक कमांड’ का नाम बदल दिया है. अब इसे फिर से इसके पुराने नाम ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ के तौर पर जाना जाएगा. इस बदलाव के साथ ही अमेरिका ने सात दशक पुरानी परंपरा को बहाल कर दिया है. हैरान करने वाली बात यह भी है कि इस कमांड की आधिकारिक वेबसाइट पर भारत का गलत नक्शा दिखाया गया है. वेबसाइट ने अपने जिम्मेदारी वाले इलाके के नक्शे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखा दिया है.
इस फैसले से अमेरिका ने साल 2018 में किए गए अपने ही एक बहुत बड़े रणनीतिक बदलाव को पलट दिया है. उस समय अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने भारत के साथ बढ़ती दोस्ती और हिंद महासागर के महत्व को देखते हुए पैसिफिक कमांड के नाम में “इंडो” शब्द जोड़ा था. अब इस शब्द को हटाना भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है. हालांकि अमेरिकी सरकार का तर्क है कि वह इस मिलिट्री कमांड की ऐतिहासिक जड़ों का सम्मान करना चाहती है. इस बेहद खास सैन्य कमांड की स्थापना साल 1947 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी.
अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि नाम बदलने से जमीनी स्तर पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. इस सैन्य कमांड की जिम्मेदारी, मिशन और भौगोलिक दायरा पहले जैसा ही रहने वाला है. यह कमांड आज भी अमेरिका के पश्चिमी समुद्री तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक काम करती रहेगी. पेंटागन ने भरोसा दिलाया है कि वह इस इलाके के अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा. एक ‘आजाद और खुले क्षेत्र’ को बनाए रखने की उसकी जो पुरानी प्रतिबद्धता है, उसमें किसी भी तरह की कोई रुकावट या कमी नहीं आएगी.
भले ही अमेरिका इसे सिर्फ नाम का बदलाव बता रहा हो, लेकिन भारत की राजनीति में इस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है. कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर अमेरिका पर बड़ा तंज कसा है. उन्होंने पूछा कि क्या यह फैसला चार देशों के संगठन ‘क्वाड’ (Quad) के ताबूत में आखिरी कील ठोकने जैसा है. इसके साथ ही थरूर ने अमेरिकी विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश का एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है. थरूर के इस तीखे बयान से भारत के कूटनीतिक गलियारों में अमेरिका की नीयत को लेकर चिंताएं साफ दिखने लगी हैं.
जानकारों का मानना है कि नाम से “इंडो” शब्द हटने से पूरी दुनिया में यह गलत संदेश जा सकता है कि अमेरिका अब भारत को उतनी तवज्जो नहीं दे रहा है. ‘इंडो पैसिफिक’ शब्द मुख्य रूप से चीन की समंदर में बढ़ती दादागिरी का मुकाबला करने के लिए इस्तेमाल होता था. हालांकि इस फैसले से ‘क्वाड’ संगठन, मालाबार नौसैनिक अभ्यास या भारत अमेरिका के रक्षा समझौतों पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा. लेकिन प्रतीकात्मक रूप से देखा जाए तो इस पूरे इलाके की सुरक्षा रणनीति में भारत का जो केंद्रीय और सबसे अहम किरदार था, वह थोड़ा हल्का जरूर पड़ गया है.
