उत्तराखंड का राज्य गठन 9 नवंबर 2000 को हुआ था। तब से राज्य की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त उछाल आया है। राज्य गठन के समय यह एक पिछड़ा पहाड़ी क्षेत्र था, लेकिन पर्यटन, जलविद्युत, उद्योग और सेवा क्षेत्र के विकास से यह भारत के तेज़ी से बढ़ते राज्यों में शामिल हो गया है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है और यह SDG इंडेक्स में भी टॉप पर रहा है।

1-कुल आर्थिक विकास (2000 से 2025 तक)
* सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP):
* 2000-01: लगभग ₹14,501 करोड़।
* 2011-12: लगभग ₹1 लाख करोड़ के आसपास।
* 2023-24: लगभग ₹3.46 लाख करोड़।
* 2024-25 (अनुमानित): ₹3.94 लाख करोड़ से ₹3.96 लाख करोड़।
* 2025-26 (अनुमानित): ₹4.29 लाख करोड़।
* कुल वृद्धि: राज्य गठन से अब तक GSDP में लगभग 26-28 गुना वृद्धि हुई है।

2• प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income):
* 2000-01: ₹15,285।
* 2011-12: लगभग ₹1,00,000।
* 2023-24: ₹2.60 लाख से ₹2.84 लाख।
* 2024-25: ₹3.10 लाख से ₹3.19 लाख।
* 2025 अनुमान: ₹3.33 लाख के आसपास।
* वृद्धि: लगभग 20-21 गुना। यह राष्ट्रीय औसत लगभग ₹2.12 लाख से 40-50% अधिक है।
* सेक्टर-वाइज योगदान (2024-25 के आधार पर)
पहला सेक्टर (कृषि, पशुपालन, वन): 9-10% कृषि में सुधार के बावजूद थोड़ी गिरावट देखने को मिली ।
दूसरा सेक्टर (उद्योग, निर्माण, विनिर्माण): 44-48% सबसे बड़ा योगदान, ख़ास कर के विनिर्माण 36% और निर्माण 8%)।
तीसरा सेक्टर (सेवा, पर्यटन): 42-46% पर्यटन का योगदान 40% से अधिक, सेवा क्षेत्र काफ़ी मजबूत हुआ ।
* राज्य की अर्थव्यवस्था अब सेवा और उद्योग-प्रधान हो गई है यानी की सर्विस क्लास और इंडस्ट्रियल फोकस्ड , जबकि गठन के समय कृषि प्रधान थी।

3.पुष्कर सिंह धामी सरकार में आर्थिक विकास, जुलाई 2021 से दिसंबर 2025 तक
पुष्कर सिंह धामी जुलाई 2021 से मुख्यमंत्री हैं। इस कार्यकाल में COVID-19 के बाद तेज़ रिकवरी देखी गई। राज्य ने निवेश आकर्षण, नीतिगत सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया।
* GSDP में लगातार बढ़ौतरी
* 2020-21 (COVID साल ): ₹2.26 लाख करोड़ (गिरावट)।
* 2023-24: ₹3.46 लाख करोड़। जबरदस्त उछाल
* 2024-25: ₹3.94 लाख करोड़ (14% का उछाल )।
* 2025-26: ₹4.29 लाख करोड़ (लगभग 9% का उछाल )।
* धामी सरकार में उछाल : लगभग 70-90% (COVID रिकवरी सहित)। औसत वार्षिक विकास दर 13-14%
* प्रति व्यक्ति आय: ₹1.99 लाख (2020-21) से बढ़कर ₹3.19 लाख (2024-25) तक पहुँच चुका है ।
* बजट बढ़ौतरी : पहला बजट (2001) ₹4,000 करोड़ था, जबकि 2025-26 का बजट ₹1,01,175 करोड़ जो की पहली बार ₹1 लाख करोड़ पार हुआ है । राजस्व अधिशेष ( Surplus): 2022-23 में ₹5,310 करोड़ ऐतिहासिक। s

4-धामी सरकार में मुख्य आर्थिक सुधार और नीतियाँ
धामी सरकार ने निवेश और रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए-
* 30 नई नीतियाँ: ऊर्जा, पर्यटन, उद्योग, EV, सोलर, हॉर्टिकल्चर जैसे क्षेत्रों में मेगा इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट पॉलिसी 2025 लागू की ।
* निवेश को बढ़ावा : इन्वेस्टर समिट्स से ₹2 लाख करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स ग्राउंडेड या चल रहे हैं । सिंगल विंडो सिस्टम मजबूत, Ease of Doing Business में सुधार।
* पर्यटन प्रमोशन: होमस्टे योजना, हजारों होमस्टे रजिस्टर्ड, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज़’ ब्रांड, वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म। पर्यटन से GSDP में 40-47% योगदान बढ़ा है ।
* उद्योग और रोज़गार: वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट, मिलेट मिशन, MSME को बढ़ावा। खनन राजस्व में बड़ी वृद्धि और पारदर्शिता ।
* ग्रीन और सस्टेनेबल विकास: सोलर, EV और CNG व्हीकल्स पर टैक्स रिबेट, हाइड्रोपावर विस्तार , ऐसी कई योजनाओं पर सब्सिडी ।

वित्तीय सुधार: राजस्व सप्लस हासिल, फिस्कल डेफिसिट कंट्रोल 2025-26 में अनुमानित सरप्लस ₹2,586 करोड़।
आर्थिक: धामी सरकार का GSDP को 5 सालों में दोगुना करने का लक्ष्य , 2027 तक ₹7-8 लाख करोड़ का विज़न।
SDG और रैंकिंग: साल 2024 में Niti Aayog SDG इंडेक्स में पहला रैंक पाने वाला राज्य ।
इंफ्रास्ट्रक्चर: केंद्र के सहयोग से बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे हुए (रोड, रेल, एयरपोर्ट)।
रोज़गार और महिला सशक्तिकरण: महिला उद्यमियों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे लाखों रोज़गार पैदा हो रहे हैं ।
वित्तीय स्थिरता: छोटे राज्यों में फाइनेंसियल मैनेजमेंट में टॉप पर।
पर्यावरण और संस्कृति: ग्रीन इकोनॉमी फोकस, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से लगातार राज्य के विकास में तेजी आ रही है ।
सारांस:
पुष्कर सिंह धामी जुलाई 2021 से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं। उनकी सरकार ने आर्थिक विकास, सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर काफ़ी फोकस किया है। सरकार ने कई ऐतिहासिक कानून लागू किए, निवेश को बढ़ावा दिया और पारदर्शिता पर जोर दिया।जिससे राज्य का आर्थिक विकास तेज हुआ और सुशासन मजबूत हुआ है , ये कदम उत्तराखंड को आत्मनिर्भर और सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में उठाये जा रहे हैं ।
