नोएडा में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. अब तक पुलिस ने इस मामले में 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है. इसी के साथ पुलिस ने 7 FIR भी दर्ज की हैं.

सोशल मीडिया पर बढ़ी एक्टिविटी
नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर हो रहा कर्मचारियों का प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी है. कई इलाकों में आज भी पुलिस के ऊपर पथराव होने की घटनाएं सामने आई हैं. हालांकि पुलिस का दावा है कि कार्रवाई करते हुए स्थिति को काबू में किया गया है. पुलिस ने अब दावा किया है कि इस पूरी घटना के पीछे एक सुनियोजित साजिश की गई है. पुलिस के मुताबिक हिंसा से पहले सोशल मीडिया पर एक्टिविटी काफी बढ़ी है और कई नए व्हाट्सएप ग्रुप्स को भी बनाया गया है.
व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए जोड़े गए कर्मचारी
जानकारी के मुताबिक इन व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए कर्मचारियों को जोड़ने की कोशिश की गई. गौतम बुद्ध नगर पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि बीते 2 दिनों में बड़ी संख्या में व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं और क्यूआर को स्कैन करके कर्मचारियों को उनमें जोड़ा गया है. इस तरह का तरीका आमतौर पर संगठित नेटवर्क के द्वारा अपनाया जाता है. पुलिस उम्मीद जता रही है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे एक संगठित और सुनियोजित सिंडिकेट भी सक्रिय हो सकता है.
300 से ज्यादा लोग हिरासत में
नोएडा में हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने अभी तक 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है. इस मामले में पुलिस ने 7 FIR दर्ज की हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आगे संख्या बढ़ भी सकती है. पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने जानकारी देते हुए बताया है कि जिन भी लोगों ने भीड़ को भड़काने का काम किया है और हिंसा फैलाने में भूमिका निभाई है, उन लोगों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा.
फंडिंग मामले में जांच कर रही पुलिस
पुलिस इस मामले में फंडिंग की जांच भी कर रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस आंदोलन में किसी तरह से आर्थिक मदद तो नहीं दी जा रही है. लक्ष्मी सिंह ने बताया कि अगर जांच में फंडिंग की साजिश सामने आती है, तो उसके आधार पर भी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ संदेशों को फैलाया गया है.
STF को सौंपी गई जांच
अभी तक 2 X हैंडल्स के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है. इसी के साथ लगभग 50 से ज्यादा बॉट हैंडल्स को चिह्नित किया गया है, जिन्हें 24 घंटे के अंदर बनाया गया था. पुलिस का मानना है कि यह हिंसा एक संगठित कोशिश थी, जिससे माहौल को भड़काऊ बनाने की कोशिश की गई है. अब मामले को देखते हुए डिजिटल ट्रेल की जांच को उत्तर प्रदेश STF को सौंप दी गई है. STF इन सभी नकली हैंडल्स की गतिविधियों, लोकेशन और उनके पीछे मौजूद लोगों की पहचान करेगी. डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर यह भी पता लगाया जाएगा कि इन हैंडल्स को कौन चला रहा था और क्या इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है.
