tcs q4 results 2026: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के वित्त वर्ष 2026 के नतीजों में कर्मचारियों की संख्या में 23,460 की कमी देखी गई है, जिसे कंपनी ने छंटनी के बजाय आंतरिक बदलाव और एट्रिशन का परिणाम बताया है. हालांकि, कंपनी ने मुनाफे में 12% की वृद्धि दर्ज की है और भविष्य में कॉलेज कैंपस के माध्यम से 25,000 से अधिक नई भर्तियों का आश्वासन दिया है.

tcs q4 results 2026: देश की बड़ी आईटी कंपनियों में गिनी जाने वाली Tata Consultancy Services ने 9 अप्रैल को वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए. इन नतीजों के बाद एक जानकारी सामने आई जिसने सबका ध्यान खींचा. कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या में एक साल के भीतर 23 हजार से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है. इस खबर के सामने आते ही आईटी सेक्टर में चर्चा शुरू हो गई. कई लोगों ने इसे बड़े स्तर की छंटनी से जोड़कर देखा. हालांकि कंपनी के एचआर विभाग ने अब इस मामले पर अपनी सफाई दी है.
तिमाही रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल कंपनी में कुल 5,84,519 कर्मचारी काम कर रहे हैं. पिछले साल की तुलना में यह संख्या करीब 23,460 कम है. इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की कमी को आमतौर पर असामान्य माना जाता है. खासकर तब जब Tata Consultancy Services को भारत में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा नियोक्ता माना जाता है. इसलिए यह सवाल उठने लगा कि क्या कंपनी में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की गई है.
इस मामले पर कंपनी के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी Milind Lakkad ने स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की संख्या में आई गिरावट को सीधे छंटनी से जोड़ना सही नहीं है. उनके अनुसार पिछले साल कंपनी के अंदर कई तरह के आंतरिक बदलाव किए गए थे. इन बदलावों से करीब 2 प्रतिशत कर्मचारियों पर असर पड़ा. उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की संख्या कम होने के पीछे कोई एक वजह नहीं है.
कंपनी का कहना है कि भर्ती की प्रक्रिया अभी भी जारी है. पिछले साल ही लगभग 44 हजार फ्रेशर्स को नौकरी दी गई. इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 के अंत में भी 2,356 नए कर्मचारियों को जोड़ा गया. इनमें अनुभवी पेशेवर और नए उम्मीदवार दोनों शामिल हैं. कंपनी ने यह भी बताया कि भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 25 हजार से ज्यादा कैंपस ऑफर पहले ही दिए जा चुके हैं. आने वाले समय में भी बड़ी संख्या में नई भर्तियां की जाएंगी.
विशेषज्ञों के अनुसार कर्मचारियों की संख्या में कमी की एक वजह यह भी हो सकती है कि कई लोग खुद नौकरी छोड़ देते हैं. इसे एट्रिशन कहा जाता है. इसके अलावा कंपनियां अब जरूरत के हिसाब से भर्ती कर रही हैं. इसे जस्ट-इन-टाइम हायरिंग मॉडल कहा जाता है. इस बीच कंपनी के सीईओ K. Krithivasan ने कहा है कि नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से आईटी कंपनियों की भूमिका खत्म नहीं होगी. बल्कि आगे चलकर बड़ी कंपनियां तकनीकी सेवाओं के लिए और ज्यादा आईटी फर्मों पर निर्भर होंगी. मार्च तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 12 प्रतिशत बढ़कर 13,718 करोड़ रुपये रहा है. कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखने के लिए कंपनी ने सालाना वेतन वृद्धि का भी ऐलान किया है.
