bank of england warning: Bank of England की डिप्टी गवर्नर सारा ब्रीडेन ने वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट की चेतावनी देते हुए कहा है कि मौजूदा कीमतें वास्तविक जोखिमों को नजरअंदाज कर रही हैं. $2.5 ट्रिलियन के निजी कर्ज बाजार (शैडो बैंकिंग) में बढ़ते तनाव और रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचे इंडेक्स के बीच उन्होंने वित्तीय स्थिरता पर बड़े सवाल उठाए हैं.

bank of england warning: दुनिया भर के शेयर बाजार इस समय तेज़ी के दौर से गुजर रहे हैं. लेकिन इसी बीच इंग्लैंड से एक ऐसी चेतावनी सामने आई है जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, Bank of England की डिप्टी गवर्नर Sarah Breeden ने कहा है कि वैश्विक शेयर बाजारों में आने वाले समय में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. उनका कहना है कि मौजूदा हालात में बाजार की कीमतें कई बड़े जोखिमों को नजरअंदाज कर रही हैं. ऐसे में अगर अचानक झटका लगा तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब दुनिया के कई बड़े शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं.
पिछले कुछ समय से वैश्विक शेयर बाजारों में तेज़ी देखी जा रही है. भारत में भी बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया है. हालांकि हाल ही में बीएसई का सेंसेक्स करीब 999 अंक और एनएसई का निफ्टी लगभग 275 अंक गिरकर बंद हुआ. इसके बावजूद अप्रैल महीने में दोनों प्रमुख इंडेक्स करीब 7 प्रतिशत तक ऊपर रहे. अमेरिका के बाजार भी मजबूती दिखा रहे हैं. S&P 500 ने 7,168.59 का नया रिकॉर्ड स्तर छू लिया. वहीं NASDAQ Composite ने भी 24,854.04 का हाई बनाया. बाद में यह मामूली गिरावट के साथ 24,836.60 पर बंद हुआ.
एशियाई बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिली है. जापान का Nikkei 225 पहली बार 60,000 के स्तर के पार निकल गया. दक्षिण कोरिया का KOSPI भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है. वहीं ब्रिटेन का FTSE 100 10,379.08 के आसपास पहुंच गया. इस इंडेक्स ने पिछले एक साल में लगभग 23 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है. इन आंकड़ों को देखकर ऐसा लग रहा है कि दुनिया भर के बाजार मजबूत स्थिति में हैं. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज़ी के बीच कई जोखिम छिपे हुए हैं.
सारा ब्रीडेन का कहना है कि बाजार की मौजूदा कीमतें वास्तविक जोखिमों को पूरी तरह नहीं दिखा रही हैं. उन्होंने कहा कि कई ऐसे खतरे हैं जो एक साथ सामने आ सकते हैं. उदाहरण के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है. निजी कर्ज के बाजार में भरोसा कम हो सकता है. नई तकनीकों और तेज़ी से बढ़ते निवेश से जुड़ी कीमतों में अचानक गिरावट भी आ सकती है. अगर ये सभी जोखिम एक साथ सामने आए तो शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इसी वजह से उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दुनिया की वित्तीय व्यवस्था ऐसे झटके के लिए तैयार है.
सबसे बड़ी चिंता निजी कर्ज के बढ़ते बाजार को लेकर जताई गई है. इसे अक्सर शैडो बैंकिंग सिस्टम भी कहा जाता है. पिछले 15 से 20 सालों में यह बाजार लगभग शून्य से बढ़कर करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. विशेषज्ञों को डर है कि अगर इस क्षेत्र में भरोसा कमजोर हुआ तो इसका असर पूरी वित्तीय व्यवस्था पर पड़ सकता है. हालांकि सारा ब्रीडेन ने यह साफ किया कि उनका मकसद बाजार में गिरावट का समय बताना नहीं है. उनका कहना है कि केंद्रीय बैंकों का असली काम यह सुनिश्चित करना है कि अगर बाजार में बड़ा झटका आता है तो वित्तीय प्रणाली उसे सहने के लिए पर्याप्त मजबूत हो.
