TMC Rebellion: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है, जहां टीएमसी के 19 बागी सांसदों ने बीजेपी के केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है. इस बगावत में शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिससे ममता बनर्जी की सरकार और पार्टी के लिए बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है.

TMC Rebellion: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आ गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. टीएमसी के विधायकों के बाद अब पार्टी के कई लोकसभा सांसद भी बगावत पर उतर आए हैं. इसी बीच खबर आई है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेताओं ने दिल्ली में बीजेपी के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है. यह बेहद खास बैठक भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास पर हुई. इस मीटिंग में टीएमसी के कई बागी सांसद एक साथ मौजूद रहे. इस बड़ी हलचल के बाद से ही बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा अचानक बहुत चढ़ गया है.
इस सीक्रेट मीटिंग को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं. बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री के घर हुई इस बैठक में टीएमसी की बड़ी नेता सयानी घोष मौजूद थीं. उनके साथ प्रतिमा मंडल, माला रॉय और मिताली बाग भी इस चर्चा का हिस्सा रहीं. इस बैठक की सबसे बड़ी बात यह रही कि वहाँ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे. यह पूरी मुलाकात करीब 1 घंटे तक चली. बंद कमरे में हुई इस बातचीत के बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि बंगाल में कोई बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने वाला है.
सूत्रों के हवाले से खबर है कि टीएमसी के करीब 19 सांसदों की एक लिस्ट तैयार हुई है. ये सभी नेता पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान का नाम भी शामिल बताया जा रहा है. खबरों के मुताबिक इन बागी सांसदों ने अपने दस्तखत के साथ एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को भी सौंप दिया है. हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक तृणमूल कांग्रेस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. ना ही पार्टी ने अभी तक इस बगावत की पुष्टि की है.
इस बागी सांसदों की सूची के सामने आने के बाद टीएमसी खेमे में खलबली मचना तय है. दरअसल लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद हैं. ऐसे में अगर 19 सांसदों की बगावत का यह दावा सच साबित होता है, तो यह ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा और करारा झटका होगा. पार्टी के अंदर मचे इस घमासान ने दीदी की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ा दी हैं. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अगर यह गुट अलग होता है, तो लोकसभा में टीएमसी की ताकत बहुत कम हो जाएगी.
वहीं दूसरी तरफ कोलकाता में भी बगावत की आग तेजी से फैल रही है. टीएमसी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी, जिन्हें हाल ही में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की मान्यता मिली है, उन्होंने एक बहुत बड़ा दावा किया है. ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि पार्टी के 64 विधायक उनके संपर्क में हैं और उनके साथ खड़े हैं. ये सभी विधायक बहुत जल्द विधानसभा अध्यक्ष को अपना पत्र सौंपने वाले हैं. ऋतब्रत बनर्जी ने साफ किया है कि उनका यह नया गुट अब एक अलग राजनीतिक पहचान के साथ काम करेगा. वे बंगाल के हक की लड़ाई को अपने तरीके से आगे बढ़ाएंगे.
