Iran responds to us proposal: अमेरिका द्वारा तनाव कम करने के लिए भेजे गए 14 सूत्रीय प्रस्ताव का ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से जवाब दिया है. जहां अमेरिका परमाणु प्रतिबंधों में राहत की बात कर रहा है, वहीं ईरान के राष्ट्रपति ने साफ किया है कि वे राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे.

Iran responds to us proposal: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक नया कूटनीतिक प्रयास सामने आया है. खबरों के अनुसार अमेरिका ने ईरान को एक नया प्रस्ताव भेजा था. इसका मकसद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की स्थिति को रोकना है. इस प्रस्ताव के बाद अब ईरान ने अपना जवाब पाकिस्तान के जरिए भेजा है. यह जानकारी ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में सामने आई है. जिससे इस पूरे मामले ने फिर से अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींच लिया है.
अमेरिका की तरफ से भेजे गए इस प्रस्ताव को एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक यह लगभग एक पेज का 14 सूत्रीय ज्ञापन है. इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ शर्तें रखी गई हैं. प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर ईरान परमाणु संवर्धन गतिविधियों पर रोक लगाता है तो अमेरिका प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है. साथ ही ईरान की फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को भी जारी करने की बात शामिल है.
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान जल्द ही इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देगा. ट्रंप ने यह भी कहा था कि वह जल्द जवाब मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. वहीं ईरान की तरफ से संकेत दिए गए थे कि वह इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है. हालांकि अभी तक कोई अंतिम सहमति या स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है.
ईरान की तरफ से सख्त रुख भी देखने को मिला है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उनका देश किसी भी हालत में दुश्मन के सामने झुकने वाला नहीं है. उन्होंने यह भी साफ किया कि बातचीत या संवाद का मतलब आत्मसमर्पण नहीं होता. उनका कहना है कि ईरान अपने अधिकारों की रक्षा मजबूती से करेगा और राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इजरायल और अमेरिका के साथ पहले हुए संघर्ष के बाद हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं. कुछ समय के लिए सीजफायर की कोशिशें जरूर हुईं लेकिन स्थिति स्थिर नहीं हो सकी. पहले पाकिस्तान में शांति वार्ता की कोशिश भी हुई थी लेकिन वह सफल नहीं हो पाई. अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे यह कूटनीतिक प्रयास शांति की ओर ले जाता है या तनाव और बढ़ता है.
