अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत में सनातन संस्कृति, हिंदुत्व और राष्ट्रवादी विचारधारा को लेकर बहस तेज हो गई है. एक्टिविस्ट रकीब अहमद नाइक ने देश के 3 मुख्यमंत्रियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. जिनमें पुष्कर सिंह धामी, योगी आदित्यनाथ और हिमंता बिस्वा सरमा शामिल हैं.

हिंदूवादी मुख्यमंत्रियों को घेरने की कोशिश
भारत में सनातन संस्कृति, हिंदुत्व और राष्ट्रवादी विचारधारा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहस एक बार फिर से तेज हो गई है. अमेरिका की तथाकथित धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की सुनवाई के दौरान भारत के उन 3 मुख्यमंत्रियों को घेरने की कोशिश की गई है, जो लगातार सनातन परंपरा, राष्ट्रहित और हिंदू संस्कृति को लेकर खुलकर बात करते हैं. अब इस मुद्दे को लेकर देश की राजनीति में भी बहस शुरू हो गई है.
इन मुख्यमंत्रियों पर प्रतिबंध की मांग
अमेरिका में आयोजित USCIRF की सुनवाई के दौरान वामपंथी-लिबरल विचारधारा से जुड़े एक्टिविस्ट रकीब अहमद नाइक ने राष्ट्रवादी संगठनों, हिंदुत्व विचारधारा और भारत की लोकतांत्रिक सरकारों के खिलाफ बयानबाजी करते हुए कई आरोप लगाए हैं. इस दौरान उन्होंने पुष्कर सिंह धामी, योगी आदित्यनाथ और हिमंता बिस्वा सरमा के ऊपर प्रतिबंध लगाने की मांग भी कर डाली है.
CM योगी, धामी और हिमंता के पीछे पड़ा अमेरिका! | USA on India#IndiaUSRelations #YogiAdityanath #HimantaBiswaSarma #PushkarSinghDhami #USIndia #Diplomacy #RealNews #FactCheck #StrategicPartnership #Geopolitics #IndiaNews #GlobalAffairs #MarcoRubio #CriticalMinerals #QuadSummit… pic.twitter.com/E0hH0fKmeq
— TheTruth24 (@08thetruth24) May 27, 2026
संगठनों को भी बनाया निशाना
मुख्यमंत्रियों पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही RSS, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों को भी निशाना बनाया गया है और उनके ऊपर सवाल उठाए गए हैं. अब देश में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जो मुख्यमंत्री हिंदू संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रवादी विचारधारा की खुलकर बात करते हैं, उन्हें विदेशी मंचों पर निशाना क्यों बनाया जा रहा है?
इस कारण चर्चा में मुख्यमंत्री
आपको बता दें कि उत्तारखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता (UCC), धर्मांतरण और अवैध कब्जों जैसे मुद्दों को लेकर काफी कड़ा रुख अपनाया है. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध, कट्टरपंथ और माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कानून का डर पैदा किया है. साथ ही असम में हिमंता बिस्वा सरमा लगातार घुसपैठ, जनसंख्या असंतुलन और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को उठाते आए हैं.
क्या अपनी ही बात करना गलत?
अब इस पूरी घटना को लेकर देश की राजनीति में भी यह बहस तेज हो गई है कि क्या अपने ही देश में अपनी जमीन बचाने की बात करना गलत है. क्या अपनी संस्कृति, अपने मंदिरों और अपनी पहचान की रक्षा करने के लिए आवाज उठाना गलत है. फिलहाल USCIRF की सुनवाई के बाद भारत की राजनीति में चर्चा को लेकर यह मुद्दा केंद्र बन गया है. देश की जनता अब यह समझ रही है कि निशाना 3 मुख्यमंत्रियों पर नहीं है, बल्कि उस सोच पर है जो भारत को उसकी जड़ों और संस्कृति और सभ्यता से जोड़कर देखती हैं.
यह भी पढ़ें- कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की पटकथा तैयार! DK शिवकुमार होंगे अगले मुख्यमंत्री; जल्द इस्तीफा देंगे सिद्दरमैया
