Bakrid Rules in Housing Society: बकरीद पर हाउसिंग सोसाइटी के भीतर जानवर की कुर्बानी देने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और स्थानीय नगर निगम की लिखित अनुमति अनिवार्य है, जिसके बिना ऐसा करना गैरकानूनी माना जाएगा. बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशानुसार खुले सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी की मनाही है

Bakrid Rules in Housing Society: बकरीद का त्योहार करीब आते ही कई शहरों की हाउसिंग सोसाइटी में कुर्बानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है. कुछ जगहों पर लोग इसकी तैयारी कर रहे हैं, तो कहीं इसका विरोध भी देखने को मिल रहा है. मुंबई समेत कई शहरों में इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है. ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी सोसाइटी के अंदर जानवर की कुर्बानी दी जा सकती है या नहीं. दरअसल, इसे लेकर कोई एक जैसा नियम पूरे देश में लागू नहीं है. हर शहर और हर सोसाइटी के अपने अलग नियम हो सकते हैं.
जानकारों के मुताबिक, किसी भी सोसाइटी में कुर्बानी करने के लिए सबसे जरूरी चीज अनुमति है. बिना परमिशन के सोसाइटी परिसर में कुर्बानी करना गैरकानूनी माना जा सकता है. अगर कोई परिवार या समुदाय सोसाइटी में कुर्बानी करना चाहता है, तो पहले वहां की आरडब्ल्यूए यानी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से मंजूरी लेनी पड़ती है. कई शहरों में नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से भी अनुमति जरूरी होती है. सभी जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही कुर्बानी की इजाजत दी जाती है.
इस मुद्दे पर पहले भी अदालत में मामले पहुंच चुके हैं. साल 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि बिना अनुमति किसी सोसाइटी में जानवर की कुर्बानी नहीं की जा सकती. कोर्ट ने यह भी कहा था कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई कर सकता है. अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया था कि जहां नियमों का उल्लंघन हो, वहां तुरंत कदम उठाए जाएं. इसी वजह से अब कई शहरों में प्रशासन पहले से सतर्क नजर आ रहा है.
आमतौर पर खुले सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी करने की अनुमति नहीं होती. प्रशासन कोशिश करता है कि कुर्बानी तय और चिन्हित जगहों पर ही हो. अगर किसी सोसाइटी के पास पहले से तय कुर्बानी स्थल मौजूद है, तो लोगों को वहीं जाने की सलाह दी जाती है. हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया था कि सोसाइटी परिसर में जानवर लाने पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती. लेकिन कुर्बानी के लिए अलग नियमों का पालन करना जरूरी है.
अगर किसी सोसाइटी में अनुमति मिल भी जाती है, तब भी कई शर्तें लागू होती हैं. कुर्बानी के लिए एक अलग और ढका हुआ स्थान तय करना पड़ता है. यह काम खुले में नहीं किया जा सकता. साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना जरूरी होता है. खून और बाकी चीजों के निस्तारण की भी उचित व्यवस्था करनी पड़ती है. प्रशासन और आरडब्ल्यूए इन सभी बातों को देखने के बाद ही मंजूरी देते हैं. यानी बकरीद पर सोसाइटी में कुर्बानी संभव है, लेकिन सिर्फ नियमों और अनुमति के दायरे में रहकर ही ऐसा किया जा सकता है.
