Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को हुई भारी गिरावट के कारण सेंसेक्स करीब 1092 अंक और निफ्टी 350 अंकों से अधिक टूट गया, जिससे निवेशकों के लगभग 5.50 लाख करोड़ रुपये डूब गए. इस ऐतिहासिक बिकवाली के पीछे मुख्य वजह विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार मुनाफावसूली, कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे और वैश्विक बाजारों में जारी तनाव को माना जा रहा है.

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी गिरावट देखने को मिली. कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी टूट दर्ज की गई. सेंसेक्स करीब 1092 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 350 अंकों से ज्यादा की कमजोरी देखने को मिली. बाजार में अचानक आई इस गिरावट से निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बन गया. सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि कुछ ही घंटों में निवेशकों के करीब 5.50 लाख करोड़ रुपये डूब गए. कई लोगों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई और अब आगे क्या होगा. लगातार हो रही बिकवाली ने छोटे निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है.
अगर निफ्टी की चाल को देखा जाए तो तस्वीर और भी चौंकाने वाली नजर आती है. आज निफ्टी करीब उसी स्तर पर पहुंच गया है, जहां वह जून 2024 में था. उस समय लोकसभा चुनाव के बाद बाजार में स्थिरता आई थी और निफ्टी पहली बार 23,500 के आसपास पहुंचा था. तब निवेशकों को उम्मीद थी कि बाजार आगे तेजी से बढ़ेगा. कुछ महीनों तक ऐसा हुआ भी और निफ्टी 26,400 तक पहुंच गया. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. पिछले दो साल में बाजार की सारी बढ़त खत्म हो चुकी है. यानी जिसने दो साल पहले पैसा लगाया था, उसे अब तक कोई खास फायदा नहीं मिला. कई निवेशकों का पोर्टफोलियो तो अभी भी नुकसान में चल रहा है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली माना जा रहा है. विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII पिछले काफी समय से भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. उनकी नजर अब दूसरे देशों के बाजारों पर ज्यादा है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की कमाई बढ़ने की रफ्तार पहले जैसी मजबूत नहीं दिख रही. इसी वजह से विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं. जब बड़े निवेशक लगातार शेयर बेचते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है. इसका असर आम निवेशकों पर भी दिखाई देता है.
इसके अलावा कई बड़ी कंपनियों के नतीजे भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे. कंपनियों के मुनाफे में तेजी नहीं दिखी, लेकिन शेयरों की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं. ऐसे में बाजार में करेक्शन आना तय माना जा रहा था. जब शेयर महंगे हो जाते हैं और कमाई कमजोर रहती है तो निवेशक मुनाफावसूली शुरू कर देते हैं. इसी वजह से ऊंचे स्तरों पर लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है. दुनिया में चल रहे युद्ध और तनाव ने भी बाजार का माहौल खराब किया है. खासकर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई हुई है.
इस गिरावट का असर सिर्फ बड़े निवेशकों तक सीमित नहीं है. म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले लोग भी परेशान नजर आ रहे हैं. जिन लोगों ने पिछले दो साल में SIP या सीधे शेयरों में निवेश शुरू किया था, उन्हें अब तक उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिला है. कई लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ने लगा है. हालांकि बाजार जानकारों का कहना है कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है. ऐसे समय में घबराकर फैसला लेने के बजाय समझदारी से निवेश करना जरूरी होता है. आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात, विदेशी निवेश और कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगी.
