Russia India Relations: ये आर्टिकल रूसी राष्ट्रपति पुतिन द्वारा भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और मजबूत आर्थिक-तकनीकी स्थिति की सराहना पर आधारित है. इसमें अमेरिकी दबाव और पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार कर दोनों देशों के बीच बने भरोसेमंद रिश्तों और वैश्विक भूमिका का उल्लेख किया गया है.

Russia India Relations: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है जिसने कभी भी किसी दूसरे देश से मिले आदेशों या दबाव को नहीं माना. पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार भारत पर रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंध कम करने का दबाव बना रहा है. खासतौर पर रूसी तेल खरीद को लेकर वॉशिंगटन कई बार अपनी नाराजगी जता चुका है. ऐसे माहौल में पुतिन की यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काफी अहम मानी जा रही है. उन्होंने साफ कहा कि किसी भी संप्रभु देश के लिए अपने फैसले खुद लेना सबसे बड़ी ताकत होती है. भारत और चीन जैसे देश इसी सिद्धांत पर आगे बढ़ते हैं. यही वजह है कि वे अपनी विदेश नीति को बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होने देते.
यह बयान रूस के सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम यानी SPIEF-2026 के दौरान सामने आया. यह रूस का सबसे बड़ा आर्थिक सम्मेलन माना जाता है. इसमें दुनिया के 130 देशों से करीब 20 हजार प्रतिनिधि शामिल हुए हैं. कार्यक्रम के दौरान जब पुतिन से पूछा गया कि क्या रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया है, तो उन्होंने इस धारणा को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों ने कभी किसी विदेशी ताकत के आदेशों पर काम नहीं किया. इसी कारण वे अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेते हैं. पुतिन ने यह भी कहा कि संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी होती है. इसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं किया जा सकता.
अपने संबोधन में पुतिन ने भारत की तकनीकी ताकत का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सूचना प्रौद्योगिकी इंडस्ट्री का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है. वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है. रूस भारत को केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद मित्र के रूप में देखता है. पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के संबंध वर्षों पुराने हैं और समय के साथ और मजबूत हुए हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में रूस और भारत के बीच आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग और बढ़ सकता है. रूस का मानना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.
रूस के राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिशें सफल नहीं हुई हैं. अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे. इसके बावजूद रूस दुनिया के कई देशों के साथ व्यापार और सहयोग जारी रखे हुए है. पुतिन ने कहा कि मजबूत और आत्मनिर्भर देशों को पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता. उन्होंने बताया कि रूस आज भी अपने सहयोगी देशों के साथ नई परियोजनाओं पर काम कर रहा है. सड़क, रेल और ऊर्जा क्षेत्र में कई योजनाएं आगे बढ़ रही हैं. उनके अनुसार पश्चिमी देशों की रणनीति रूस को कमजोर करने में सफल नहीं हो सकी है.
पुतिन ने यह भी कहा कि तनाव और मतभेदों के बावजूद कई क्षेत्रों में रूस और पश्चिमी देशों के बीच आर्थिक सहयोग जारी रहा है. उन्होंने ऊर्जा परियोजनाओं और अमेरिका को यूरेनियम निर्यात का उदाहरण देते हुए कहा कि जब आर्थिक लाभ की बात आती है तो कई देश व्यावहारिक रुख अपनाते हैं. पुतिन के अनुसार कुछ देशों ने सार्वजनिक रूप से रूसी परियोजनाओं से दूरी बनाने की घोषणा की थी, लेकिन वे आज भी कई परियोजनाओं में जुड़े हुए हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि रूस आगे भी निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहेगा. वहीं भारत के संदर्भ में उन्होंने दोहराया कि नई दिल्ली अपनी स्वतंत्र नीति पर कायम रहेगी और अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही फैसले लेती रहेगी. यही कारण है कि रूस भारत को एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार मानता है.
