US-Iran War: पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ ‘इस्लामाबाद MoU’ 30 दिन के भीतर ही टूट गया है, जिसके बाद ईरान ने समझौते की शर्तों को मानने से मना करते हुए अमेरिका और खाड़ी देशों के सैन्य ठिकानों पर भीषण मिसाइल हमले किए हैं.

US-Iran War: मिडल ईस्ट से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है. ईरान और अमेरिका के बीच हुआ शांति समझौता शनिवार को पूरी तरह से खत्म हो गया है. पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए इस समझौते को ‘इस्लामाबाद MoU’ के नाम से जाना जाता था.
अब इस पूरे समझौते का चैप्टर बंद हो चुका है और यह डस्टबिन में जा चुका है. ईरान ने साफ-साफ एलान कर दिया है कि वह अब इस समझौते के किसी भी नियम या शर्त का पालन नहीं करेगा.
ईरान ने इसके पीछे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है. ये पहला मौका है जब ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस समझौते के टूटने का दावा किया है.
केवल 30 दिनों में खत्म हुआ शांति का बड़ा वादा
यह समझौता जितनी तेजी से हुआ था, उतनी ही तेजी से खत्म भी हो गया. बीते 18 जून को दोनों देशों के बीच इस पर सहमति बनी थी, लेकिन शनिवार 18 जुलाई को ठीक 30 दिन बाद यह पूरी तरह से खत्म हो गया. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि असल में अमेरिका ने अपने सभी वादे तोड़ दिए हैं. अमेरिका के इस कदम के बाद यह MoU पूरी तरह से बेकार साबित हो चुका था. ईरान का कहना है कि जब अमेरिका ने अपनी प्रतिबद्धताएं नहीं निभाईं, तो जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी अपने सभी वादों पर अमल करना पूरी तरह से बंद कर दिया है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों से बढ़ी दरार
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को कम करना था. इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और परमाणु कार्यक्रम पर बात होनी थी. लेकिन जुलाई की शुरुआत से ही इसमें दरारें दिखने लगीं. होर्मुज स्ट्रेट में ओमान के समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान ने हमले शुरू कर दिए. ईरान का तर्क था कि जहाज उसके तय रास्ते से ही जाएं. इस पर अमेरिका भड़क गया और उसने ईरानी नौसेना पर हमला कर दिया. इसके बाद दोनों देशों के बीच फिर से सीधा सैन्य टकराव शुरू हो गया.
इजरायल और फ्रीज फंड को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान
तनाव बढ़ने के बाद दोनों देशों के बीच तकनीकी बातचीत भी बंद हो गई. ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने उसके फ्रीज किए हुए पैसे वापस नहीं जारी किए. साथ ही अमेरिका लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को रोकने में भी पूरी तरह नाकाम रहा. इन आरोपों के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान खुद समझौते की शर्तों का पालन नहीं कर रहा है. ट्रंप ने एलान किया कि दोनों देशों के बीच का युद्धविराम अब पूरी तरह “खत्म” हो चुका है. इसके बाद अमेरिका ने ईरान के बिजली ग्रिड, बंदरगाहों और पुलों जैसे बुनियादी ढांचे पर भीषण हवाई हमले करके उन्हें तबाह कर दिया.
शनिवार की रात हुए भीषण हमले और कुवैत-जॉर्डन में भारी नुकसान
शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात को दोनों देशों के बीच जंग और तेज हो गई. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उन्होंने लगातार सातवीं रात ईरान के अंडरग्राउंड हथियारों के गोदामों और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की. जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दाग दीं. ईरान ने कुवैत के तेल सुविधा केंद्र और पानी को साफ करने वाले डिसैलिनेशन प्लांट पर बड़ा हमला किया. इस हमले से कुवैत में पानी और बिजली का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इसके अलावा ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिका के अल-अजराक एयर बेस पर भी लंबी दूरी की मिसाइलों से हमला किया, जिससे वहां भयानक आग लग गई.
