Monsoon Session: लोकसभा के मॉनसून सत्र से ठीक पहले स्पीकर ने शिवसेना (UBT) के 6 और टीएमसी के 20 बागी सांसदों को अलग बैठने की मंजूरी दे दी है, जिससे संसद में विपक्ष का संख्याबल काफी घट गया है.

Monsoon Session: संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. इस बार लोकसभा के भीतर सत्ता और विपक्ष का पूरा समीकरण बदल चुका है. दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को बहुत बड़ा झटका लगा है. इन दोनों ही पार्टियों के कई बागी सांसदों को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में अलग बैठने की मंजूरी दे दी है. इस बड़े फैसले के बाद जहां एक तरफ ममता और उद्धव का संख्याबल संसद में काफी कम हो गया है, वहीं दूसरी तरफ एनडीए खेमे में शामिल एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ताकत काफी बढ़ गई है. सोमवार से शुरू हो रहे सत्र में अब बिल्कुल नया नजारा दिखेगा.
उद्धव ठाकरे के छह सांसदों ने पाला बदला, शिंदे गुट हुआ मजबूत
महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से यह घटनाक्रम बेहद चौंकाने वाला है. उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) के कुल नौ सांसद चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. लेकिन मॉनसून सत्र से ठीक पहले इनमें से छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है. लोकसभा स्पीकर ने आधिकारिक तौर पर इन छह सांसदों के विलय को अपनी हरी झंडी दे दी है. इस फैसले के बाद अब लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर सीधे 13 हो गई है. वहीं दूसरी तरफ अब उद्धव ठाकरे के पास संसद में केवल तीन सांसद ही बचे हैं. पाला बदलने वाले इन नेताओं में संजय दीना पाटिल और ओमप्रकाश राजे निंबालकर जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
ममता बनर्जी की टीएमसी में बहुत बड़ी टूट, 20 सांसद हुए अलग
पश्चिम बंगाल में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाली ममता बनर्जी को भी दिल्ली में बड़ा झटका लगा है. साल 2024 के आम चुनाव में टीएमसी के टिकट पर 29 सांसद जीतकर लोकसभा आए थे. इनमें से 20 बागी सांसदों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया है और वे ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया’ (NCPI) नाम के एक नए गुट में शामिल हो गए हैं. लोकसभा सचिवालय ने इन सभी 20 बागी सांसदों के लिए सदन में अपनी मूल पार्टी से अलग बैठने की व्यवस्था कर दी है. अलग होने वाले इस गुट में यूसुफ पठान, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं. इस बागी गुट ने साफ तौर पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को अपना समर्थन देने और एनडीए में शामिल होने की इच्छा जताई है.
डीएमके भी कांग्रेस से अलग बैठेगी, विपक्ष का बदला भूगोल
संसद के इस मॉनसून सत्र में सिर्फ टीएमसी और शिवसेना ही नहीं, बल्कि विपक्ष के पूरे कुनबे की तस्वीर बदल रही है. तमिलनाडु से आने वाली डीएमके पार्टी ने भी लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने की मांग की है. यह फैसला तब हुआ जब कांग्रेस ने डीएमके के साथ अपना दशकों पुराना गठबंधन तोड़कर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की नई पार्टी टीवीके (TVK) के साथ हाथ मिला लिया. सूत्रों की मानें तो लोकसभा स्पीकर जल्द ही डीएमके की इस अलग बैठने की मांग को भी मंजूरी दे सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो विपक्षी बेंचों पर बैठने वाले नेताओं की पूरी जमावट बदल जाएगी और कांग्रेस पूरी तरह अलग-थलग दिखाई देगी.
कानूनी सलाह के बाद स्पीकर ने लिया फैसला, क्या कहता है कानून
इस पूरे मामले में टीएमसी और उद्धव ठाकरे गुट ने स्पीकर के सामने दलील दी थी कि इन बागी सांसदों की सदस्यता तुरंत रद्द की जानी चाहिए. उनका कहना था कि यह सीधे तौर पर दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन है. हालांकि, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कोई भी फैसला सुनाने से पहले कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों से लंबी चर्चा की. उन्होंने पिछली मिसालों और संसद के पुराने नियमों का बारीकी से अध्ययन किया. इसके बाद ही यह ‘कानूनी रूप से सही’ कदम उठाया गया. बागी गुट के लिए एक और बड़ी राहत की बात यह रही कि संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू ने रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में इस नए गुट (NCPI) को शामिल होने के लिए अलग से न्योता भी भेज दिया है.
