Meenakshi Natarajan: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 जून 2026) को सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने निर्वाचन अधिकारी द्वारा अपना नामांकन पत्र रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद वे इस तरह के मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकते.
“अगर इस मोड़ पर हस्तक्षेप किया तो नई परंपरा शुरू होगी” – सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस अतुल चांदुरकर की अवकाशकालीन पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कांग्रेस नेता के वकील से कड़े सवाल पूछे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाने और नामांकन खारिज होने के बाद कोर्ट का सीधे दखल देना सही नहीं है. अगर इस स्तर पर हस्तक्षेप किया गया, तो यह एक गलत और नई परंपरा की शुरुआत होगी, जिससे देश की चुनावी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
सुप्रीम कोर्ट की मीनाक्षी को सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव के बीच में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं तय हैं. अदालत ने नटराजन को सलाह दी कि उनके पास केवल चुनाव आयोग के समक्ष चुनाव याचिका दायर करने का ही कानूनी विकल्प मौजूद है.
क्यों रद्द हुआ था मीनाक्षी नटराजन का नामांकन?
आपको बता दें कि 9 जून को मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव और रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने बीजेपी की आपत्तियों के बाद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था. आरोप था कि नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे (Form 26) में हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े कानूनी मामले या समन की जानकारी छिपाई थी.
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