opposition parties merger: महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्षी दलों के कांग्रेस में महा विलय की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसे शिवसेना (UBT) और कांग्रेस ने स्वागत योग्य बताया है. इस पर पलटवार करते हुए बीजेपी ने कांग्रेस को ‘डूबता हुआ जहाज’ करार दिया, जिसके जवाब में कांग्रेस ने बीजेपी की तुलना अपने ही सहयोगियों को खत्म करने वाली ‘डायन’ से कर दी है.

opposition parties merger: हाल ही में आए पश्चिम के चुनावी नतीजों का असर अब भारत की राजनीति पर साफ दिखने लगा है. इन नतीजों के बाद जहां पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर बिखराव की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ टीएमसी के कांग्रेस में विलय यानी पूरी तरह मिल जाने की चर्चा भी तेज हो गई है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पार्टियों के आपस में मिलने की यह बात सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं है. इस चुनावी हलचल की गूंज अब सुदूर महाराष्ट्र की राजनीति में भी सुनाई देने लगी है. वहां के सियासी गलियारों में भी क्षेत्रीय पार्टियों के कांग्रेस में विलय को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो चुका है.
इस पूरे विवाद और चर्चा की शुरुआत शिवसेना (UBT) के कद्दावर नेता संजय राउत के एक बयान से हुई है. संजय राउत ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए एक बड़ा सुझाव दे डाला. उन्होंने कहा कि एनसीपी (SP) के मुखिया शरद पवार को अब एक बड़ी पहल करनी चाहिए. पवार साहब को उन सभी छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों को वापस देश की सबसे पुरानी पार्टी यानी कांग्रेस में मिलाने के लिए आगे आना चाहिए, जो कभी न कभी कांग्रेस से ही टूटकर अलग बनी थीं. राउत का मानना है कि ऐसे कई बड़े नेता हैं जो पहले कांग्रेस सरकारों का हिस्सा रहे हैं और आज भी उनकी विचारधारा कांग्रेस से मिलती है. अगर ये सब एक मंच पर आ जाएं, तो नरेंद्र मोदी के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी की जा सकती है.
संजय राउत के इस विलय वाले बयान पर महाराष्ट्र कांग्रेस की तरफ से भी तुरंत हरी झंडी मिल गई. महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने इस पर अपनी सहमति जताते हुए दावा किया कि देश में अब ऐसी सोच लगातार मजबूत हो रही है. लोग चाहते हैं कि टीएमसी और शरद पवार की एनसीपी जैसी धर्मनिरपेक्ष पार्टियां वापस कांग्रेस के साथ आ जाएं. पटोले ने तो यहां तक दावा कर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर इस दिशा में बातचीत और प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. उन्होंने पुरानी बात याद दिलाते हुए कहा कि शरद पवार की पार्टी ने पहले भी कांग्रेस के साथ विलय का एक प्रस्ताव दिया था, लेकिन कुछ अंदरूनी कारणों की वजह से उस समय इस फैसले में थोड़ी देरी हो गई थी.
नाना पटोले ने देश के मौजूदा हालात का हवाला देते हुए इस कदम को बेहद जरूरी बताया. उनका कहना है कि आज देश का संवैधानिक ढांचा कमजोर हो रहा है और वोटों का बिखराव सबसे बड़ी समस्या बन चुका है. विपक्ष के वोट आपस में बंटने से सीधे तौर पर बीजेपी को फायदा होता है. इसलिए संविधान को बचाने और धर्मनिरपेक्ष सोच को जिंदा रखने के लिए सभी समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट होना ही पड़ेगा. पटोले के मुताबिक, चाहे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस हो या फिर शरद पवार की पार्टी, दोनों के भीतर अब यह नजरिया साफ दिखने लगा है कि उन्हें जल्द से जल्द कांग्रेस के बड़े छाते के नीचे आ जाना चाहिए.
विपक्ष के इस ‘महामर्जर’ यानी महा विलय के प्लान पर सत्ता पक्ष ने भी तुरंत तीखा तंज कसा है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे एक ‘डूबता हुआ जहाज’ बता दिया. फडणवीस ने हंसते हुए कहा कि अजीब बात है कि न तो कांग्रेस खुद कुछ कह रही है और न ही शरद पवार की पार्टी कुछ बोल रही है. कोई तीसरा व्यक्ति ही बीच में आकर इस विलय की वकालत कर रहा है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दुनिया का कोई भी समझदार इंसान कांग्रेस जैसे डूबते हुए जहाज पर कभी सवार होना पसंद नहीं करेगा. फडणवीस ने साफ किया कि विपक्ष चाहे जितना मर्जी एकजुट हो जाए, बीजेपी के गठबंधन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला बल्कि उनके लिए और राजनीतिक जगह खाली हो जाएगी.
कांग्रेस को ‘डूबता जहाज’ कहना बीजेपी को भारी पड़ गया क्योंकि इसके जवाब में महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने बीजेपी पर पलटवार करते हुए उसकी तुलना एक ऐसी ‘डायन’ से कर दी जो अपने ही दोस्तों और सहयोगियों को खा जाती है. सपकाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी की असल फितरत ही यही है कि वह अपने साथ आने वाले छोटे क्षेत्रीय दलों को धीरे धीरे निगल जाती है और बाद में उनका राजनीतिक अस्तित्व ही खत्म कर देती है. दूसरी तरफ, जब शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले से इस विलय के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बड़ा ही कूटनीतिक जवाब दिया. उन्होंने मौसम का उदाहरण देते हुए कहा कि बाहर निकलने से पहले छाता लेना है या रेनकोट पहनना है, इसका फैसला वह बारिश शुरू होने के बाद ही करेंगी. हालांकि, उन्होंने विपक्ष को मजबूत करने के संजय राउत के आइडिया का स्वागत जरूर किया.
महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही यह अंदरूनी खींचतान असल में बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाने की रणनीति का हिस्सा है. कांग्रेस खुद को इस पूरे गठबंधन का मुख्य केंद्र मानती है, वहीं क्षेत्रीय दलों के सामने दोहरी चुनौती है. उन्हें बीजेपी को हराने के लिए एकजुट भी होना है और साथ ही अपनी पार्टी की अलग पहचान को भी बचाकर रखना है. कुल मिलाकर, पश्चिम के चुनावी नतीजों ने देश के इस हिस्से में भी राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह गर्मा दिया है.
