Ayodhya News: श्रीराम मंदिर की दान की राशि में हेरफेर के मामले में एसआईटी (विशेष जांच दल) की तफ्तीश तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रही. जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे आशंका है कि सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई थी ताकि रकम पार कर सुबूत मिटाए जा सकें. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत और आईजी कानून-व्यवस्था के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी की टीम ने कल राम जन्मभूमि परिसर में लगातार 11 घंटे तक जांच की. इस दौरान एसआईटी ने दान प्रबंधन से जुड़े कई बड़े चेहरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है.
CCTV से छेड़छाड़ की आशंका
सूत्रों का दावा है कि मंदिर परिसर के भीतर जहां चढ़ावे और भारी कैश की गिनती होती थी, वहां लगे CCTV कैमरों के फुटेज के साथ छेड़छाड़ या उन्हें जानबूझकर बंद किए जाने की प्रबल आशंका है. एसआईटी की तकनीकी टीम इन कैमरों के डिजिटल रिकॉर्डर (DVR) को खंगाल रही है. इसके अलावा, जांच में सरकारी और निजी बैंकों के कुछ कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही और मिलीभगत भी सामने आई है.
200 लोगों की एक विस्तृत लिस्ट तैयार
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट के महत्वपूर्ण ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को पूछताछ के लिए आधिकारिक तौर पर सम्मन जारी किया है. इसके साथ ही, ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से भी जांच दल ने आमने-सामने बिठाकर लंबी पूछताछ की है. वहीं, मामले में संदिग्ध भूमिका को लेकर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी एसआईटी की टीम ने घंटों पूछताछ की. एसआईटी ने इस पूरे मामले में पूछताछ के लिए करीब 200 लोगों की एक विस्तृत लिस्ट तैयार की है.
पूछताछ में कई रसूखदार और अंदरूनी नामों का खुलासा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत में हिरासत में लिए गए पांच आरोपियों (जिनमें लवकुश मिश्रा, मनीष यादव आदि शामिल हैं और जिनके पास से लाखों की नकदी बरामद हुई थी) ने पूछताछ में कई रसूखदार और अंदरूनी नामों का खुलासा किया है. एसआईटी की टीम अब इन आरोपियों के बयानों की कड़ियों को जोड़ने और उनके वित्तीय लेन-देन की तस्दीक करने में जुटी है. राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी साफ कर दिया है कि जांच में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषियों को हर हाल में बेनकाब किया जाएगा.
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