Starlink satellite control failed: स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट के कंट्रोल खोने की घटना ने अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे और टकराव के खतरे को सामने ला दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं भविष्य में इंटरनेट, जीपीएस और संचार सेवाओं पर बड़ा असर डाल सकती हैं.

Starlink satellite control failed: स्पेसएक्स की स्टारलिंक सेवा से जुड़ा एक सैटेलाइट दिसंबर 2025 में अचानक खराब हो गया और उसने अपना कंट्रोल खो दिया, यह सैटेलाइट उस समय पृथ्वी की निचली कक्षा में था, जब इसकी प्रोपल्शन टैंक से गैस निकलने लगी है. इसके बाद सैटेलाइट अनियंत्रित होकर घूमने लगा. कंपनी के अनुसार यह सैटेलाइट कुछ हफ्तों में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और जलकर खत्म हो जाएगा, लेकिन इस घटना ने अंतरिक्ष की बढ़ती चिंता को उजागर कर दिया है.
सैटेलाइट का ज्यादातर हिस्सा सुरक्षित
यह सैटेलाइट करीब 418 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम कर रहा था. खराबी के बाद इसकी ऊंचाई कुछ किलोमीटर कम हो गई और इसके कुछ छोटे टुकड़े भी अलग हुए. हालांकि स्पेसएक्स का कहना है कि सैटेलाइट का ज्यादातर हिस्सा सुरक्षित है. स्थिति को समझने के लिए दूसरे सैटेलाइट की मदद से इसकी तस्वीरें ली गईं, जिनमें इसके सोलर पैनल खुले हुए दिखे, लेकिन ढांचा क्षतिग्रस्त नजर आया.
यह घटना अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे के खतरे की ओर इशारा करती है. आज पृथ्वी के चारों ओर हजारों सैटेलाइट घूम रहे हैं. अकेले स्टारलिंक के ही 9 हजार से ज्यादा सैटेलाइट सक्रिय हैं. जब इतने ज्यादा सैटेलाइट एक ही कक्षा में होते हैं, तो उनके आपस में टकराने का खतरा बढ़ जाता है. एक छोटी टक्कर भी बड़ी समस्या बन सकती है.
केसलर सिंड्रोम

वैज्ञानिक इसे केसलर सिंड्रोम कहते हैं. इसका मतलब है कि एक टक्कर से बना मलबा दूसरी टक्करों को जन्म देता है और यह सिलसिला चलता रहता है. इससे अंतरिक्ष मलबे से भर सकता है. हाल की रिसर्च बताती है कि अब सैटेलाइट बहुत पास-पास से गुजर रहे हैं और अगर किसी बड़े सोलर स्टॉर्म जैसी घटना हुई, तो कुछ ही दिनों में बड़ी तबाही मच सकती है.
अगर ऐसा हुआ तो इसका असर सीधे हमारी जिंदगी पर पड़ेगा, इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क, जीपीएस, बैंकिंग, मौसम की जानकारी और सुरक्षा सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. हवाई और समुद्री यात्रा में परेशानी बढ़ेगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरिक्ष को सुरक्षित रखने के लिए सख्त नियम और मलबा हटाने की तकनीक जरूरी है. यह घटना बताती है कि अंतरिक्ष अब पहले जितना सुरक्षित नहीं रहा है.
