21 जून को री-नीट का पेपर आयोजित किया गया था. करीब 20 लाख छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया था. इसी बीच एक खबर सामने आई हैं. दरअसल, दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद का दावा है कि कई परीक्षा केंद्रों पर हिंदू छात्रों से कलावा उतरवाया गया. वहीं, मुस्लिमों को हिजाब और बुर्का पहनने की इजाजत दी गई है. हिंदुओं और मुस्लिम धर्म की मान्यताओं के साथ में ऐसा भेदभाव क्यों किया है.
एक्स पर पोस्ट कर उठाया मुद्दा
दरअसल, विनोद बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस बात को कहा था. उन्होंने लिखा ‘परीक्षा के सफल आयोजन के लिए एनटीए को ढेर बधाई हो, लेकिन वह एक बार यह स्पष्ट कर दें कि हिंदू छात्र के कलावा एवं साधारण माला पहनने पर इतनी रोक क्यों लगाई गई थी. वहीं, मुस्लिम लड़कियों को हिजाब और बुर्का पहनने की अनुमति दी गई थी.’
जांच की मांग में तेजी की गई
साथ ही उन्होंने इस व्यवहार को सांप्रदायिक भेदभाव बताया है. उन्होंने इस मामले में NTA से जांच करवाने की मांग की है. इस पोशाक सबंधी सभी नियमों के बारे में पूरी जानकारी दी जाएं. हालांकि, यह मुद्दा केवल एक ही नहीं कई लोगों ने उठाया है. कई परीक्षा केंद्रों पर बच्चों का कहना हैं कि उनसे कलावा उतरवाया गया. विश्व हिंदू परिषद ने जांच की मांग की है.
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