Land allotment controversy: ये खबर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पारिवारिक ट्रस्ट को 5 एकड़ औद्योगिक जमीन आवंटित किए जाने के बीजेपी के आरोपों और उस पर प्रियांक खड़गे के कड़े पलटवार की पूरी जानकारी देता है.

Land allotment controversy: कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों जमीन आवंटन को लेकर एक बहुत बड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके मंत्री बेटे प्रियांक खड़गे पर सत्ता का दुरुपयोग करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के राज में खड़गे परिवार के एक निजी ट्रस्ट को पांच एकड़ बेहद कीमती औद्योगिक जमीन दी गई है. इस प्राइम लोकेशन वाली सरकारी जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. कर्नाटक की इस जमीन नीति, औद्योगिक विकास और राजनीतिक विवादों के कानूनी पहलुओं को गहराई से समझने के लिए आप लेखक एम. चंद्रशेखर की प्रसिद्ध किताब ‘कर्नाटक पॉलिटिक्स एंड लैंड रिफॉर्म्स’ के प्रशासनिक और कानूनी संदर्भों का सहारा ले सकते हैं. यह किताब राज्य में सरकारी जमीनों के आवंटन और उससे जुड़े विवादों पर बहुत ही सटीक जानकारी देती है.
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी के मुताबिक यह पूरा मामला साल 2024 के दौरान हुए एक फैसले से जुड़ा हुआ है. उनका आरोप है कि ‘कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड’ (KIADB) ने नियम कायदों को ताक पर रखकर ‘सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट’ को यह पांच एकड़ बेशकीमती जमीन अलॉट कर दी. सरकारी दस्तावेजों में इस आवंटन की वजह एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) का काम करना बताया गया था. बीजेपी ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया है कि यह कोई मामूली बंजर जमीन नहीं है. यह बंगलुरू के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा है. इस मामले की गूंज अब अदालती चौखट तक भी पहुंच चुकी है, जहाँ इस पूरे अलॉटमेंट की स्वतंत्र जांच कराने के लिए एक याचिका दायर की गई है.
इस पूरे विवाद में बीजेपी ने जो सबसे बड़ा सवाल उठाया है, वह इस ट्रस्ट की योग्यता और अनुभव को लेकर है. प्रदीप भंडारी ने साफ शब्दों में कहा कि जिस सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को इतनी बड़ी और कीमती जमीन तोहफे में दे दी गई, उसका डिफेंस रिसर्च या एयरोस्पेस के क्षेत्र में दूर दूर तक का कोई पुराना रिकॉर्ड या अनुभव नहीं है. ऐसे में बिना किसी विशेष योग्यता के इतनी बड़ी डील करना साफ तौर पर भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है. बीजेपी का सीधा आरोप है कि यह आवंटन किसी पारदर्शी या सामान्य टेंडर प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ. बल्कि खड़गे परिवार ने दिल्ली से लेकर कर्नाटक तक अपने ऊंचे पद और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके इस बेशकीमती जमीन को अपने नाम कराया है.
बीजेपी ने इस मामले को कानूनी तौर पर बेहद गंभीर बताते हुए प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) का जिक्र किया है. भंडारी ने कहा कि यह पूरा मामला इस कानून की धारा 13(1)(a) और 13(1)(b) के तहत एक सीधे और गैर जमानती अपराध के दायरे में आता है. उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इस पूरे विवाद की तुलना राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा पर लगे पुराने जमीन घोटालों से कर दी. बीजेपी का कहना है कि खड़गे परिवार ने भी सरकारी जमीन हथियाने के लिए ठीक वही पुराना ‘कांग्रेस फॉर्मूला’ अपनाया है जो गांधी परिवार सालों से करता आ रहा है. उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में इस ट्रस्ट के जरिए दबाई गई ऐसी कई और जमीनों के राज जनता के सामने खोले जाएंगे.
इन तीखे और गंभीर आरोपों के बाद कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर आकर बहुत ही कड़ा पलटवार किया है. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब सिर्फ आरएसएस (RSS) के बड़े नेताओं को खुश करने के लिए किया जा रहा है. देश की जनता आज अयोध्या के राम मंदिर के खर्चों का हिसाब मांग रही है, लेकिन बीजेपी का पूरा तंत्र कलबुर्गी में भगवान बुद्ध के नाम पर बने ट्रस्ट की जवाबदेही तय करने में ओवरटाइम ड्यूटी कर रहा है. प्रियांक ने चुनौती देते हुए सवाल उठाया कि कर्नाटक में बीजेपी के पांच पांच मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में मोदी सरकार पिछले 12 सालों से राज कर रही है, अगर मैंने कोई भी गलत काम किया है तो मैं आज जेल के बजाय बाहर क्यों घूम रहा हूं. उन्होंने साफ किया कि उनके ट्रस्ट के सारे कागज पूरी तरह वैध हैं और वे किसी भी मंच पर खुली चर्चा के लिए तैयार हैं.
