khawaja asif pok kashmiri statement: ये खबर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा PoK के नागरिकों पर दिए गए विवादित बयान और उस पर बिलावल भुट्टो व मौलाना फजलुर रहमान की तीखी प्रतिक्रिया की पूरी जानकारी देता है.

khawaja asif pok kashmiri statement: पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों वहां के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बेहद विवादित बयान ने नया सियासी भूचाल ला दिया है. भारत के खिलाफ हमेशा आग उगलने वाले आसिफ ने इस बार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के नागरिकों को लेकर ही एक बेहद शर्मनाक और विवादित टिप्पणी कर दी है. उनके इस बयान के बाद खुद पाकिस्तान के भीतर ही उनकी थू थू होने लगी है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के युवा चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी और जमीयत उलेमा ए इस्लाम (JUI F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान जैसे बड़े नेताओं ने अपनी ही सरकार के रक्षा मंत्री को आड़े हाथों लिया है और उन्हें जमकर लताड़ लगाई है. पाकिस्तान की इस अंदरूनी कश्मीर नीति, वहां के राजनीतिक संकट और कूटनीतिक बयानों के इतिहास को गहराई से समझने के लिए आप लेखक आरिफ जमाल की प्रसिद्ध किताब ‘शैडो वॉर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ जिहाद इन कश्मीर’ (Shadow War) का संदर्भ ले सकते हैं. यह किताब पाकिस्तान के शासकों द्वारा कश्मीरियों के इस्तेमाल और वहां की जमीनी हकीकत पर बहुत ही प्रामाणिक और ऐतिहासिक दस्तावेज पेश करती है.
दरअसल, यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में पीओके के रावलकोट और मीरपुर इलाके के लोगों पर अपनी भड़ास निकाली. उन्होंने बेहद गैर जिम्मेदाराना अंदाज में कह दिया कि इस क्षेत्र में रहने वाले लोग ‘असली कश्मीरी’ हैं ही नहीं और वे उन्हें कश्मीरी नहीं मानते हैं. आसिफ ने इसके पीछे यह अजीब तर्क दिया कि रावलकोट और मीरपुर के स्थानीय लोग कश्मीरी भाषा के बजाय पोटोहारी भाषा बोलते हैं, इसलिए उन्हें कश्मीरी कहलाने का कोई हक नहीं है. रक्षा मंत्री के मुंह से अपने ही नागरिकों के लिए ऐसी अलगाववादी और भेदभाव से भरी भाषा सुनकर पाकिस्तान की संसद से लेकर सड़कों तक जबरदस्त उबाल आ गया. विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया कि बाद में ख्वाजा आसिफ को चारों तरफ से घिरने के बाद अपने इस विवादित बयान पर सार्वजनिक रूप से सफाई देने के लिए मजबूर होना पड़ा.
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह जहरीला बयान ऐसे समय में दिया है जब पूरा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर इन दिनों सरकार के खिलाफ सुलग रहा है. वहां ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के बैनर तले आम जनता सड़कों पर उतरकर भयंकर विरोध प्रदर्शन कर रही है. इस ऐतिहासिक आंदोलन का मुख्य कारण आसमान छूती महंगाई, बिजली की बेतहाशा बढ़ी कीमतें और वहां के हुक्मरानों की घोर मनमानी है. इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी पुलिस ने भारी हिंसा का सहारा लिया, जिसमें कई बेकसूर स्थानीय नागरिकों की जान भी जा चुकी है. पीओके के लोग लंबे समय से अपनी भयानक आर्थिक तंगी, बुनियादी राजनीतिक अधिकारों और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मदद करने के बजाय उनके वजूद पर ही सवाल उठा रही है.
ख्वाजा आसिफ के इस बयान पर पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (संसद) में भी जमकर हंगामा हुआ. पीपीपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ ने संसद में खड़े होकर कहा कि इतने बड़े और जिम्मेदार पद पर बैठे किसी वरिष्ठ मंत्री को ऐसा बचकाना और ‘जनरल स्टेटमेंट’ कभी नहीं देना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि इस नफरत भरे बयान से लाखों कश्मीरियों की भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं. अशरफ ने खुद रक्षा मंत्री की तरफ से रावलकोट के पीड़ित लोगों से हाथ जोड़कर माफी भी मांगी. उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि कश्मीर के हालात पहले से ही बहुत नाजुक हैं. वहां लगी आग को पानी डालकर बुझाने की जरूरत है, न कि ऐसे कड़वे बयान देकर उसमें और ज्यादा तेल छिड़कने की.
इस पूरे विवाद में बिलावल भुट्टो जरदारी का हमला सबसे ज्यादा तीखा और आक्रामक रहा. बिलावल ने नेशनल असेंबली में अपनी ही सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया कि एक देश का रक्षा मंत्री सरेआम रावलकोट के कश्मीरियों को कश्मीरी मानने से इनकार कर दे, भला ऐसी घटिया बात को कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है. उन्होंने गुस्से में कहा कि इतने बड़े गुनाह के बाद भी ख्वाजा आसिफ ने अब तक न तो देश से माफी मांगी है और न ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है, वे आज भी शान से कैबिनेट में बैठे हुए हैं. बिलावल ने इसे कश्मीरियों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया. वहीं, मौलाना फजलुर रहमान ने भी सरकार को तंज कसते हुए कहा कि जब देश के शासक ही भावुक और हिंसक भाषा बोलने लगें, तो वह सरकार की गरिमा के बिल्कुल खिलाफ होता है. इस बड़े विवाद के बाद अब शहबाज शरीफ सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर आ गई है.
