अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी मामले के बाद अब बदरी-केदार से भी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. दरअसल, बदरी-केदार मंदिर समिति पर भी मंदिर के पैसों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने आरटीआई से प्राप्त हुए दस्तावेजों के बाद में यह खुलासा किया है.
क्या है यह मामला
दरअसल, अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि मंदिर एक्ट की धारा 26 (च) के अंतर्गत समिति को केवल मंदिर से संबंधित कामों के लिए के लिए यात्रा भत्ता दिया जा सकता है. साथ ही सदस्यों को विधायकों के समान ही रोजाना 6000 रुपये का दैनिक भत्ता तथा 4 KM प्रति किलोमीटर की दर यात्रा के लिए पैसे दिए जाएंगे. केवल सरकारी कामों के लिए और अधिकारिक बैठकों के लिए ही मंदिर के लोगों को यह पैसा दिया जाता है.
अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने आरोप लगाते हुए बताया कि BKTC के सदस्यों की बैठक 8 महीने में केवल एक बार हुई थी. उसके बाद भी लेकिन बहुत सारे सदस्यों ने केवल 8 महीनों के अंदर अपने व्यक्तिगत चीजों को सरकारी दिखाकर भत्ता ले लिया है. चौंकाने वाली बात तो यह है कि बैठक केवल एक ही बार कराई गई थी.
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बसंत पंचमी पर बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के लिए डेट को फिक्स करने हेतु नरेंद्रनगर राजमहल में बैठक आयोजित की गई थी. अधिकांश सदस्यों ने उस कार्यक्रम में आयोजित होकर भुगतान प्राप्त कर लिया. जो कि पूरा कार्यक्रम टिहरी राजपरिवार आयोजित करते हुए आया है. उसका मंदिर समिति के कार्यों से कोई मतलब नहीं होता है.
हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि उन्होंने आरोप लगाए है. इससे पहले भी उन्होंने इस मामले को उजागर किया है. इससे पहले उन्होंने बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय सिंह प्रवाण पर आरोप लगाते हुए था कि विजय ने अपने घर को कार्यालय और अपनी पत्नी को 4th grade का कर्मचारी बताकर प्रतिमाह धनराशि भुगतान किया. साथ ही मंदिर कोष से 11 लाख रुपये तीर्थ पुरोहितों को बांटने का आरोप लगाया था.
मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले नेगी बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का पक्ष सुनना चाहते हैं. हालांकि, उनसे संपर्क हो नहीं पा रहा है. उनका कहना है कि अगर कोई अध्यक्ष या समिति अपना पक्ष सामने नहीं लाएगा, तो रिपोर्ट सार्वजनिक करेंगे.
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