strait of hormuz us control: होर्मुज की खाड़ी पर अमेरिकी कब्जे के डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद ईरान ने युद्ध को लंबा खींचने की चेतावनी दी है.

strait of hormuz us control: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब अमेरिका का पूरा नियंत्रण है. उन्होंने अमेरिकी नौसेना की इस नाकेबंदी को ‘स्टील की दीवार’ बताया और कहा कि ईरान अब इसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकता. ट्रंप ने तंज कसते हुए यह भी लिखा कि अब ईरान मध्य पूर्व का दादा नहीं रहा. वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी साफ़ कर दिया है कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है.
ईरान की लंबी खींचने की रणनीति
ट्रंप के इस बयान पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. IRGC के सीनियर सलाहकार मोहम्मद रजा नकदी का कहना है कि ईरान इस टकराव को तब तक लंबा खींच सकता है जब तक कि ट्रंप का राष्ट्रपति कार्यकाल खत्म नहीं हो जाता. ईरान की रणनीति अमेरिका को धीरे-धीरे कमजोर करने की है. उनका मानना है कि अगर इस युद्ध को अगले कार्यकाल तक खींचा गया, तो कोई भी भविष्य में ईरान पर हमला करने से पहले सौ बार सोचेगा.
शांति समझौते की बातचीत ठप
अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी जंग को रोकने के लिए चल रही बातचीत पूरी तरह से अटक गई है. बीते जून के महीने में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था. लेकिन होर्मुज की खाड़ी में जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने कार्रवाई की और यह समझौता टूट गया. अमेरिका का आरोप है कि ईरान समझौते के तहत समुद्री रास्ते को नहीं खोल रहा है. दूसरी तरफ तेहरान का कहना है कि वाशिंगटन ने अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया और प्रतिबंध नहीं हटाए.
पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश
दो बड़े मुल्कों के बीच जारी इस जंग को रोकने के लिए पड़ोसी देश भी सक्रिय हो गए हैं. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस सिलसिले में तेहरान का दौरा किया है. वहां उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री से मुलाकात की. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि वे क्षेत्रीय शांति के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि ट्रंप ने साफ़ कह दिया है कि उन्हें ईरान पर कोई भरोसा नहीं है और उसने लगातार झूठ बोला है.
तनाव के बीच समुद्र में हमले तेज हो गए हैं. यमन के पास लाल सागर में ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों ने एक व्यापारिक जहाज पर हमला कर दिया. इस हमले में चार नाविकों की जान चली गई, जिनमें तीन पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे. हाउती गुट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने भी कार्रवाई करते हुए ईरान जा रहे एक कंटेनर जहाज पर दो मिसाइलें दाग दीं. तेहरान ने साफ कहा है कि जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं होंगी, होर्मुज का रास्ता बंद रहेगा.
कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा असर
इस वैश्विक संकट का सीधा असर दुनिया भर के व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ रहा है. हालांकि इतने गंभीर तनाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में मामूली गिरावट देखने को मिली है. बुधवार को कच्चे तेल की कीमत 0.55 प्रतिशत घटकर 88.42 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. इसके बावजूद आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज का समुद्री रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें तेजी से उछल सकती हैं.
