जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में रहने वाले लोगों की कमाई का सबसे बड़ा साधन पर्यटक ही होते हैं. जितने टूरिस्ट या व्यक्ति यहां पर आएंगे. उतना ही यहां के स्थानीय लोगों को फायदा होगा. जितने कम लोग यहां पर आएंगे, उतना ही उनकी रोजी रोटी पर संकट पैदा होगा. 2025 में पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद में यहां का माहौल काफी बदल गया था.
श्रीनगर में दिखा असर
केवल यहां का ही कारोबार ठप नहीं हुआ बल्कि श्रीनगर तक में इसका भारी असर देखने को मिला था. बात करें सबसे ज्यादा असर पड़ने वाले ग्रुप की, तो वह खच्चर और पोनी के कारोबारियों पर पड़ा था. इनकी पूरी रोजी रोटी इन्हीं पर निर्भर होती है. इसी कारण से जब आतंकी हमला हुआ. तो उनका जीवन पूरी तरीके से अस्त व्यस्त हो गया. टूरिस्ट की संख्या पहले के मुकाबले बहुत ही कम हो गई. जीवन चलाना पूरी तरीके से असंभव सा हो गया.
व्यापारियों के जीवन का केंद्र
हालांकि, अमरनाथ यात्रा के शुरू होते ही कारोबारियों के चेहरे की खुशी फिर से लौट आई है. उनके चेहरे से गायब हुई खुशी. अमरनाथ की यात्रा से वापस आ गई है. पहले जैसा तो नहीं लेकिन अभी जितनी कमाई हो रही है वह उनके जनजीवन को वापस से पटरी पर लाने के लिए काफी अच्छी है. लोगों के मन से धीरे-धीरे इस आतंकवादी हमले का डर जा रहा है. अमरनाथ की यात्रा संजीवनी बनकर वापस लौटी है. पहलगाम की चहल पहल के लौटने से कारोबारी के चेहरे खिले-खिले दिखाई दिए है. अमरनाथ यात्रा केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं बल्कि व्यापारियों के जीवन का केंद्र बन चुका है.
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