Saudi Pakistan Iran: सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ते तनाव के कारण रक्षा समझौते में बंधा पाकिस्तान सीधे तौर पर युद्ध में घिसटने से घबरा रहा है, इसलिए उसने ईरान को सऊदी पर हमला न करने की कड़ी चेतावनी दी है.

Saudi Pakistan Iran: सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ती तनातनी ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है. पाकिस्तान के हाथ पांव इसलिए फूल रहे हैं क्योंकि उसे डर है कि अगर वहां जंग छिड़ी तो उसे न चाहते हुए भी इस लड़ाई के दलदल में कूदना पड़ेगा. यही वजह है कि अब पाकिस्तान सीधे तौर पर ईरान को आंखें दिखा रहा है. पाकिस्तानी हुक्मरानों ने साफ लफ्जों में ईरान को चेतावनी दी है कि सऊदी अरब पर किसी भी तरह का हमला पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा और यह उनके लिए एक ‘रेड लाइन’ की तरह है. यह वही पाकिस्तान है जो कुछ दिनों पहले तक ईरान और सऊदी के बीच दोस्ती कराने का दिखावा कर रहा था.
क्यों फंसा है पाकिस्तान का पेंच
दरअसल पाकिस्तान अपनी ही बुनी हुई सुरक्षा संधि के जाल में फंस गया है. पिछले साल ही पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक बड़ा रक्षा समझौता किया था. इस समझौते के तहत पाकिस्तान के हजारों सैनिक और लड़ाकू विमानों का दस्ता सऊदी अरब में सुरक्षा के लिए तैनात है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ये पाकिस्तानी सैनिक सऊदी और यमन के बॉर्डर पर मुस्तैद हैं. ऐसे में अगर हूती विद्रोही सऊदी पर कोई भी मिसाइल या ड्रोन हमला करते हैं तो उसकी सीधी जद में वहां मौजूद पाकिस्तानी सैनिक आएंगे.
ईरान और हूती का कनेक्शन
पूरी दुनिया जानती है कि यमन के हूती विद्रोहियों को ईरान की तरफ से हथियार और पैसा मिलता है. यानी हूती वही करते हैं जो ईरान उनसे करने को कहता है. हाल ही में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलें दागकर पिछले चार साल से चले आ रहे युद्धविराम को तोड़ दिया है. हूतियों का आरोप है कि सऊदी ने उनके हवाई अड्डे पर हमला किया था. इस एक हमले के बाद से ही पाकिस्तान को लग रहा है कि ईरान जानबूझकर हूतियों के जरिए सऊदी अरब को उकसा रहा है.
लाल सागर बंद होने का बड़ा डर
पाकिस्तान को एक और बड़ा डर सता रहा है कि ईरान अपने इन लड़ाकों के जरिए लाल सागर (Red Sea) के समुद्री रास्ते को बंद करवा सकता है. अगर लाल सागर का रूट ब्लॉक होता है तो पूरी दुनिया के साथ साथ सऊदी अरब के व्यापार को तगड़ा झटका लगेगा. ऐसी स्थिति में सऊदी चुप नहीं बैठेगा और वह हूतियों पर बड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा. इसके जवाब में जब हूती पलटवार करेंगे तो रक्षा समझौते के कारण पाकिस्तान के पास सऊदी अरब की तरफ से युद्ध में शामिल होने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा.
ईरान सरकार के अंदर आपसी फूट
पाकिस्तान के कुछ बड़े अधिकारियों का दावा है कि इस समय ईरान सरकार के अंदर ही भारी फूट चल रही है. ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और वहां के विदेश मंत्री जैसे राजनीतिक चेहरे शांति चाहते हैं. लेकिन दूसरी तरफ ईरान की सेना यानी ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) पूरी तरह से युद्ध के मूड में है. पाकिस्तान के सुरक्षा जानकारों का मानना है कि इस समय ईरान के राजनीतिक फैसलों पर वहां की सेना पूरी तरह हावी हो चुकी है, जो पूरे मिडिल ईस्ट को जंग की आग में झोंकने पर आमादा है.
