एक तरफ NEET पेपर लीक और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली को लेकर देशभर से आए युवा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं… संसद की ओर मार्च निकाल रहे हैं… और केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ… पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसान भी एक बार फिर आंदोलन की राह पर निकल पड़े हैं। किसान दिल्ली कूच करना चाहते हैं… लेकिन पंजाब के खनौरी बॉर्डर और हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया है। दिल्ली की सीमाओं पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। यानी… दिल्ली में छात्रों का आंदोलन अभी शांत भी नहीं हुआ था कि… किसानों ने भी मोर्चा खोल दिया। लेकिन इस बार किसानों का आंदोलन MSP को लेकर नहीं है। इस बार लड़ाई भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA को लेकर है। आखिर किसान इस समझौते का विरोध क्यों कर रहे हैं? सरकार के किस फैसले से नाराज़ हैं? और क्यों उन्हें लगता है कि, इससे भारतीय खेती पर बड़ा संकट आ सकता है? आइए समझते हैं… द ट्रुथ 24 की इस खास रिपोर्ट में…
दिल्ली की ओर क्यों कूच कर रहे हैं किसान?
किसानों का कहना है कि… भारत और अमेरिका के बीच जिस मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA पर बातचीत चल रही है, फ्रेमवर्क लगभग तैयार हो चुका है… अगर वह मौजूदा स्वरूप में लागू हो गया… तो भारतीय किसानों को सबसे बड़ा नुकसान होगा। किसानों का आरोप है कि अमेरिका अपने किसानों और डेयरी सेक्टर को भारी सब्सिडी देता है। अगर वहां के सस्ते गेहूं, मक्का, दालें, सोयाबीन, दूध और डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में आने लगे… तो भारतीय किसान उनके सामने टिक नहीं पाएंगे। किसानों का कहना है कि भारत का छोटा किसान पहले ही लागत और मौसम की मार झेल रहा है… ऐसे में विदेशी सस्ते उत्पादों से मुकाबला करना लगभग असंभव होगा। यही वजह है कि किसान इस समझौते का विरोध करते हुए दिल्ली कूच कर रहे हैं।
पहले भी हो चुका है बड़ा किसान आंदोलन
यह पहली बार नहीं है… जब किसान दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। साल 2020 में केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी। इसके विरोध में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और कई राज्यों के हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर लगभग 13 महीने तक डटे रहे। यह आंदोलन देश के सबसे लंबे किसान आंदोलनों में से एक बना। आखिरकार नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया। उस आंदोलन के बाद किसानों को उम्मीद थी कि सरकार खेती से जुड़े बड़े फैसलों में उनकी राय को प्राथमिकता देगी। लेकिन अब किसानों का कहना है कि FTA जैसे अहम मुद्दे पर भी उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। इसलिए उन्हें एक बार फिर सड़क पर उतरना पड़ा है।
बॉर्डर पर क्यों रोके गए किसान?
दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को हरियाणा के शंभू बॉर्डर और पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर रोक दिया गया। पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग कर दी… कंटीले तार लगाए गए… भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए। प्रशासन का कहना है कि, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं किसानों का कहना है कि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है… उन्हें दिल्ली जाकर अपनी बात रखने से नहीं रोका जाना चाहिए।
FTA से किसानों को क्या डर है?
किसानों का कहना है कि अगर अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में आने लगे… तो सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को होगा। दूध उत्पादकों की आय घट सकती है… अनाज और दालों के दाम प्रभावित हो सकते हैं… और गांवों की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। किसान संगठनों की मांग है कि सरकार किसी भी ऐसे समझौते से पहले किसानों से व्यापक बातचीत करे… और यह भरोसा दे कि भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
क्या निकलेगा समाधान?
यानी… एक तरफ छात्र शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं… तो दूसरी तरफ किसान भारत-अमेरिका FTA के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। दोनों आंदोलनों का केंद्र दिल्ली बन चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि… क्या सरकार किसानों की आशंकाओं को दूर करेगी? क्या FTA पर किसानों से बातचीत होगी? या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा? क्योंकि किसानों का साफ कहना है… अगर उनकी बात नहीं सुनी गई… तो उनका संघर्ष और तेज होगा।
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