Indore Cyber Crime: इंदौर में ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0’ के तहत साइबर ठगी के म्यूल अकाउंट नेटवर्क का भंडाफोड़, 2 हजार में खुला बैंक खाता 10 हजार में बेचा गया.

Indore Cyber Crime: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में साइबर अपराधियों का एक बड़ा और अनोखा खेल सामने आया है. यहां साइबर ठगों ने आम लोगों के बैंक खातों को ही खरीद-बिक्री का जरिया बना लिया है. परदेशीपुरा थाना पुलिस ने ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0’ के तहत कार्रवाई करते हुए इस पूरे फर्जीवाड़े की परतों को उघाड़ा है. जांच में पता चला है कि ठगों का यह नेटवर्क गरीब और भोले-भाले लोगों के नाम पर बहुत सस्ते में बैंक खाते खुलवाता था. इसके बाद इन खातों को आगे ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था. पुलिस ने इस पूरे मामले में पांच आरोपियों को नामजद किया है, जिनमें से चार को पकड़कर पूछताछ शुरू कर दी गई है.
ऐसे पकड़ा गया संदिग्ध म्यूल अकाउंट
गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम पोर्टल (I4C) से पुलिस को कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली थी. जब परदेशीपुरा पुलिस ने इस डेटा की गहनता से जांच की, तो नंदानगर स्थित केनरा बैंक का एक खाता बेहद संदिग्ध निकला. यह खाता असल में एक ‘म्यूल अकाउंट’ था, यानी ऐसा खाता जिसका इस्तेमाल ठगी का पैसा ट्रांसफर करने के लिए होता है. जब पुलिस ने इस खाते की गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि इसी खाते का इस्तेमाल करके उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में लाखों रुपये की साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है.
दो हजार से शुरू होकर 10 हजार तक पहुंची कीमत
पुलिस ने जब इस संदिग्ध खाते के असली मालिक मोनीश उर्फ मोनू मंडलोई को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो परत-दर-परत सच बाहर आ गया. मोनीश ने बताया कि उसके दोस्त पियूष कुशवाह ने उससे बैंक में खाता खुलवाया था. खाता खुलने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और पूरी बैंकिंग किट पियूष को सौंप दी गई. इसके बदले मोनीश को सिर्फ 2,000 रुपये मिले. इसके बाद पियूष ने इस पूरी किट को अपने साथी ऋषि पवार को 5,000 रुपये में बेच दिया. फिर ऋषि ने इसी खाते को रानी उर्फ रूपेश मंगरोलिया को 10,000 रुपये में थमा दिया.
क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर पैसों की हेराफेरी
जांच में पुलिस को इस गिरोह का एक और खतरनाक तरीका पता चला. गिरोह का मुख्य आरोपी रूपेश मंगरोलिया डिजिटल करेंसी यानी यूएसडीटी (USDT) को भारतीय रुपये में बदलने का झांसा देता था. वह लोगों से पैसे ऐंठकर इसी तरह खरीदे गए फर्जी म्यूल अकाउंट्स में मंगवाता था. इसके बाद उस पैसे को अलग-अलग खातों में भेजकर गायब कर दिया जाता था. इस पूरे फर्जी नेटवर्क में सुजल सोनी नाम के एक अन्य आरोपी की भूमिका भी सामने आई है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है.
चार आरोपी पुलिस हिरासत में, एक की तलाश जारी
इंदौर पुलिस ने इस मामले में कुल पांच लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने मोनीश मंडलोई, पियूष कुशवाह, ऋषि पवार और सुजल सोनी को हिरासत में ले लिया है. इन चारों से थाने में कड़ाई से पूछताछ की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके. वहीं गिरोह का मुख्य सरगना रानी उर्फ रूपेश मंगरोलिया अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. पुलिस की कई टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही हैं.
