पुलवामा हमले में आरोपी मोहम्मद इकबाल राथर ने 5 से 10 सितंबर के बीच अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए 10 दिन की अस्थायी रिहाई की मांग की थी. अब आरोपी की इस याचिका को कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि लोगों की सुरक्षा ज्यादा जरुरी है.
पुलवामा हमले के आरोपी मोहम्मद इकबाल राथर की अंतरिम जमानत की अर्जी को जम्मू की NIA कोर्ट ने ठुकरा दिया है. बताया जा रहा है कि इकबाल ने अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए 10 दिन की जमानत की गुहार लगाई थी, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि देश और लोगों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं शादी में शामिल होने के निजी हित से कहीं अधिक अहम है.
आपको बता दें कि आरोपी मोहम्मद इकबाल राथर ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) शनिवार 5 से 10 सितंबर के बीच अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए 10 दिन की अस्थायी रिहाई की मांग की थी. जिसे अब कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.
वर्चुअली शामिल हो सकेगा इकबाल
हालांकि मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं, शादी में शामिल होने के आरोपी के निजी हित से कहीं अधिक जरूरी है. सुनवाई के बाद कोर्ट ने मानवीय आधार पर इकबाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी बहन की शादी में वर्चुअली शामिल होने की परमिशन दे दी है.
तनवीर अहमद मलिक की ख़ारिज की याचिका
जानकारी के मुताबिक इससे पहले जम्मू की स्पेशल NIA कोर्ट ने मंगलवार को साल 2019 के किश्तवाड़ हथियार छीनने के मामले में आतंकी सहयोगी तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. यह मामला मार्च 2019 की घटना से जुड़ा था, जिसमें हथियारों से लैस हिज़्बुल मुजाहिदीन (HM) के आतंकवादियों ने किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर के एस्कॉर्ट इंचार्ज से एक AK-47 राइफल, 3 मैगज़ीन और 90 जिंदा कारतूस छीन लिए थे.
साल 2020 में गिरफ्तार हुआ था इकबाल
NIA ने साल 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले के मामले में मोहम्मद इकबाल राथर को जुलाई साल 2020 में गिरफ्तार किया था. इस आतंकी हमले में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के 40 जवान शहीद हो गए थे. आरोपी इकबाल जम्मू-कश्मीर के बडगाम का रहने वाला है और उसके ऊपर कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सदस्य और इस हमले के मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद उमर फारूक की आवाजाही में मदद करने का आरोप है. फारूक अप्रैल 2018 में जम्मू इलाके से भारतीय सीमा में घुसा था.
