AIMIM के नेता ने यूपी में ट्रैफिक एडवाइज़री के जारी होने के बाद में नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने इस एडवाइजरी को आस्था के नाम पर भेदभाव करना बताया है. दरअसल, सावन महीने में कांवड़ यात्रा शुरू होने जा रही है. इस दौरान ट्रैफिक बहुत देखने को मिलता है. इसी कारण से मेरठ पुलिस की तरफ से एडवाइज़री जारी की. इसमें शहर में कई जगहों पर किए जाने वाले रूट डायवर्जन प्लान को लागू किया गया है.
इसी को लेकर AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने मेरठ ट्रैफिक पुलिस पर निशाना साधा है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘कुछ दिन पहले 5 मिनट की ईद की नमाज से आपत्ति थी, मुकदमे दर्ज होने व पासपोर्ट रद्द होने की बात हो रही थी. कुछ लोग कह रहे थे सड़क आमलोगों के चलने के लिए है धार्मिक क्रिया के लिए नहीं, लेकिन आज मेरठ पुलिस द्वारा ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई. इसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि जिन सरकारी बसों का संचालन मेरठ से होता था. वह अब बाहर से संचालित की जाएगी. साथ ही मुख्य मार्गों पर लिमिटेड कट दिए और स्कूल बंद होना तो मानों मामूली बात है. मार्ग को भी पूरी तरीके से बंद कर दिया जाता है. हम सबकी आस्था का सम्मान करते हैं, लेकिन आस्था के नाम पर भेदभाव करना असंवैधानिक और सही नहीं है. एक तरफ 5 मिनट की नमाज पढ़ने पर मुकदमा दर्ज कर देने की बोली गई है. तो दूसरी ओर कावड़ यात्रा के दौरान पुष्प वर्षा करने की बात कही गई है. ‘
‘नमाज़ पर आपत्ति और मुकदमा होता है’
शादाब चौहान ने आगे कहा कि ‘जो लोग 5 मिनट की नमाज पर आपत्ति कर रहे थे वह अब 15 दिन के रास्तों के बंद होने पर क्यों नहीं बोल रहे? और जो मीट की दुकान बंद होगी जिससे कारोबार प्रभावित होगा उस विषय पर वह कब बोलेंगे? एवं पिछले कई वर्षों में देखा गया है कि जो मुस्लिम दुकानदारों की दुकान या होटल रास्तों में पढ़ते हैं उनको जबरदस्ती कुछ गुंडे बंद करवाते हैं वह भी पूरी तरह असंवैधानिक है, हर बार तांडव जैसी स्थिति उत्पन्न होती रही है.’
ये भी पढ़ें: ग्रेटर नोएडा में थार हादसे का रहस्य! पति बचा- पत्नी की मौत, जांच में जुटी पुलिस
