Public examinations amendment bill 2026: देश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने और पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ प्रस्तुत किया। इस बिल में नकल माफिया, परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त से सख्त प्रावधान किए गए हैं.
अधिकतम 5 करोड़ रुपये जुर्माना और 8 वर्ष तक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन के तहत दोषियों के लिए सजा और जुर्माना दोनों बढ़ाए गए हैं. अनुचित साधनों के मामलों में न्यूनतम सजा 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक हो सकती है, जबकि जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक किया जा सकता है. परीक्षा आयोजन से जुड़े सेवा प्रदाताओं पर अधिकतम 5 करोड़ रुपये जुर्माना और 8 वर्ष तक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी रखा गया है.
कितने दिनों में पूरी होगी मामलों की सुनवाई
विधेयक में परीक्षा घोटालों की जांच के लिए विशेष कार्यबल, फास्ट-ट्रैक अदालतें और विशेष लोक अभियोजकों की व्यवस्था का प्रस्ताव है. जांच दो माह में पूरी करने और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से लोक परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत होगी.
सरकार ने क्यों उठाया ये कदम
हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक होने और परीक्षा से जुड़ी संगठित गड़बड़ियों की घटनाओं को देखते हुए, मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए ये प्रस्तावित संशोधन लाए गए हैं। इनका उद्देश्य अधिक जवाबदेही तय करना, ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त रोक लगाना और लोक परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना है.
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