भारत में अभी के समय में E20 पेट्रोल का मुद्दा काफी चर्चा में है. देश के सभी लोगों का केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर गुस्सा फूटा है. ऐसे में बता दें अदालत में चल रहे केस में केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने साफ किया है कि ‘इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम’ E20 पहल पूरी तरह से केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन होता है. उनका उस नीति से कोई भी सीधा संबंध नहीं होता है. एथेनॉल की खरीद OMCs स्वतंत्र रूप से करती है.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक सिविल याचिका दायर की थी. उसमें उन्हें आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार के लिए भ्रामक और डीपकेक वीडियो फैलाई जा रही है, जिसके बाद अदालत ने उन्हें Meta, X और Google LLC जैसी कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मंजूरी दे दी थी.
उन्होंने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर पोस्ट और AI वीडियो है, जिसमें ये बातें की जा रही है कि भारत की ‘इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम’ से उनके बेटे और उनके व्यवसाय को फायदा होगा. उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एथेनॉल कारोबार का देश के उत्पादन में 0.5% से भी कम योगदान है. इसी कारण से यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि यह नीतियां उनके परिवार को फायदा पहुंचने के लिए की जा रही है. उन्होंने उन पोस्ट को छवि खराब करने वाला बताया है.
एथेनॉल मामला क्या है?
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय देशों में चल रहे तनाव के कारण पेट्रोल और कई चीजों की आवाजाही में परेशानी आने लगी थी. आयात-निर्यात ठप हो गया था. इसी कारण से गैस और पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ गई थी. कीमतें बढ़ते देख सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ा दी थी, जिसके बाद लोगों का आरोप था कि उनकी गाड़ियां अब कम चल रही है. साथ ही उसका इंजन भी खराब हो रहा है. वहीं, सरकार का कहना था कि गाड़ियां E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरीके से सही है.
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