Indus Water Treaty: भारत द्वारा सिंधु जल संधि को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित करने से पाकिस्तान में पानी और अर्थव्यवस्था का गहरा संकट पैदा हो गया है, जिसके खिलाफ उसने यूएनएससी (UNSC) का रुख किया है.

Indus Water Treaty: भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के बाद से पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया है. वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर भारत के खिलाफ लगातार दुष्प्रचार कर रहा है. पाकिस्तान का कहना है कि भारत इस संधि को अकेले रद्द नहीं कर सकता. उसका दावा है कि नदियों का पानी रोकने से वहां भीषण सूखा पड़ जाएगा और करोड़ों लोगों की जान जोखिम में आ जाएगी. हालांकि भारत ने साफ कह दिया है कि पानी और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते.
पाकिस्तान के छद्म युद्ध पर भारत का बड़ा हमला
पाकिस्तान दशकों से भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता आ रहा है. वह लंबे समय तक परमाणु हथियारों की धमकी देकर भारत की जवाबी कार्रवाई से बचता रहा. लेकिन पिछले दस सालों में भारत ने अपनी नीति पूरी तरह बदल दी है. सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने सीधे पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकी ठिकानों को तबाह किया. भारत ने साफ कर दिया है कि अब हर आतंकी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा.
पहलगाम हमले के बाद लिया गया कठोर फैसला
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत के सब्र का बांध टूट गया. भारत ने कड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को तुरंत प्रभाव से रोक दिया. इस संधि के तहत पाकिस्तान को सिंधु नदी तंत्र का लगभग 80 प्रतिशत पानी मिलता था. यही पानी उसकी खेती, अर्थव्यवस्था और जीडीपी का बड़ा जरिया है. संधि रुकते ही भारत ने नदियों का डेटा साझा करना बंद कर दिया है और नए बांधों का निर्माण तेज कर दिया है.
आर्थिक संकट में घिरा पाकिस्तान
भारत की यह गैर-सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चोट साबित हुई है. पानी की किल्लत और अनिश्चितता के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है. घबराकर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) तक पहुंच गया है और मदद की गुहार लगा रहा है. लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं से पनप रहे आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम नहीं लगाता, तब तक कोई राहत नहीं मिलेगी.
अब कभी बहाल नहीं होगी यह संधि
भारत सरकार के शीर्ष मंत्रियों ने इस मुद्दे पर देश का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है. गृह मंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा है कि यह संधि अब भविष्य में कभी बहाल नहीं की जाएगी. वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि बातचीत तभी संभव है जब पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को हमेशा के लिए बंद कर दे. भारत के इन कड़े बयानों से साफ है कि यह फैसला कोई तात्कालिक कदम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति है.
