मुरादाबाद: कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही के लिए मुरादाबाद जिला प्रशासन ने एक अनूठी पहल की है. सावन माह में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मुरादाबाद प्रशासन ने कांवड़ मार्गों पर विशेष डिजिटल QR कोड व्यवस्था लागू की है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिवभक्तों की सुरक्षा, सुविधा और उन्हें उपलब्ध कराए जा रहे खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करना है.
कोड स्कैन से मिलेगी हर जानकारी
प्रशासन द्वारा कांवड़ मार्गों पर लगाए गए QR कोड को स्कैन कर श्रद्धालु संबंधित शिविर, सेवा केंद्र, चिकित्सा सुविधाओं और प्रशासनिक सहायता से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. इसके साथ ही खाद्य सामग्री बेचने वाले प्रतिष्ठानों और भंडारों की निगरानी भी QR कोड प्रणाली के माध्यम से की जाएगी.
अधिकारियों के अनुसार, इस डिजिटल व्यवस्था से किसी भी शिकायत, आपात स्थिति या खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संबंधी जानकारी तुरंत प्रशासन तक पहुंच सकेगी। प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है. मुरादाबाद में पहली बार लागू की गई इस व्यवस्था को कांवड़ यात्रा प्रबंधन में तकनीक के प्रभावी उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी
कांवड़ यात्रा को लेकर अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं. कांवड़ मार्गों पर जनसहयोग से विश्राम स्थल बनाए जाएंगे. श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे पेयजल की व्यवस्था रहेगी. कांवड़ मार्गों की रोजाना सुबह 5 से 8 बजे तक सफाई होगी. यात्रा मार्गों पर मोबाइल शौचालय भी उपलब्ध किए जाएंगे. शिविर स्थलों पर महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग सुविधाएं होंगी. जिलाधिकारियों और निकाय अधिकारियों को शासन ने निर्देश भेज दिए हैं.
कब शुरू हुई थी कांवड़ यात्रा
कांवड़ यात्रा मुख्य रूप से भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा प्रकट करने और उनकी कृपा पाने के लिए की जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस यात्रा की शुरुआत समुद्र मंथन के समय हुई थी. माना जाता है कि त्रेतायुग में श्रवण कुमार ने अपने अंधे माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर गंगा स्नान कराया था. वहीं से पवित्र जल लाने की यह परंपरा शुरू हुई।परशुराम जी द्वारा जलाभिषेक: एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम ने सबसे पहले पुरा महादेव (बागपत) में कांवड़ से गंगाजल लाकर शिवजी का अभिषेक किया था.
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