Murshidabad muslim mps nda stance: मुर्शिदाबाद के तीन पूर्व टीएमसी सांसदों ने अपने मतदाताओं और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी और एनडीए गठबंधन से रणनीतिक दूरी बनाकर तटस्थ रुख अपनाया है.

Murshidabad muslim mps nda stance: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय मुर्शिदाबाद के तीन सांसदों की काफी चर्चा हो रही है. सांसद अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान की वजह से राज्य के राजनीतिक माहौल में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. ये तीनों नेता पहले टीएमसी छोड़कर एक अलग गुट के तहत नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए थे. इसके बाद बीजेपी के नेतृत्व वाले केंद्रीय गठबंधन एनडीए से दूरी बनाकर रखने के फैसले ने सबको हैरान कर दिया है. यह कदम उनकी एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति को दिखाता है.
एनडीए की बैठकों से बनाई दूरी
इन तीनों सांसदों ने केंद्र सरकार के गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल न होने का रास्ता चुना है. वे नई दिल्ली में होने वाली एनडीए की बड़ी संसदीय बैठकों से लगातार दूरी बनाए हुए हैं. केंद्र और राज्य के बड़े नेताओं से ये केवल अपने क्षेत्र के प्रशासनिक कामों पर ही बात करते हैं. जब पत्रकारों ने इनसे भविष्य के राजनीतिक फैसलों पर सवाल पूछे तो उन्होंने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया. जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने बताया कि वे गृह मंत्री से केवल दो खास मुद्दों पर चर्चा करने गए थे और किसी राजनीतिक गठबंधन पर बयान नहीं देना चाहते.
सिर्फ स्थानीय विकास के मुद्दों पर जोर
सांसद केवल अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को उठाने में लगे हैं. वोटर लिस्ट में सुधार और स्थानीय प्रशासन जैसे मुद्दों पर बात करके वे अपनी साख बचाना चाहते हैं. वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि उन पर विचारधारा से समझौता करने के आरोप न लगें. केंद्र सरकार से पूरी तरह न जुड़कर वे अपनी राजनीतिक जमीन बचा रहे हैं. इसका सीधा असर आने वाले समय में पश्चिम बंगाल के राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है.
मुर्शिदाबाद का राजनीतिक समीकरण
मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल का एक बहुत ही संवेदनशील इलाका माना जाता है. यहाँ की आबादी में अल्पसंख्यकों की संख्या काफी ज्यादा है. ऐसे क्षेत्र के प्रतिनिधियों के लिए सीधे तौर पर बीजेपी के साथ हाथ मिलाना जोखिम भरा हो सकता है. इससे उनके जमीनी वोटर और समर्थक उनसे नाराज हो सकते हैं. यही वजह है कि ये सांसद केंद्र के हर फैसले का बिना सोचे-समझे समर्थन नहीं कर रहे हैं. वे साफ संदेश दे रहे हैं कि स्थानीय हालात राष्ट्रीय स्तर के गठबंधनों पर भारी पड़ सकते हैं.
बागी गुट को संभाले रखने की चुनौती
20 सदस्यों वाली पार्टी के अंदर इन तीन सांसदों का अलग रुख अपनाना एक नई चुनौती खड़ी करता है. राष्ट्रीय पार्टियां अक्सर अलग-अलग नेताओं को मिलाकर एक बड़ा वोट बैंक बनाने की कोशिश करती हैं. लेकिन ये सांसद पार्टी के सामूहिक फैसलों के बजाय अपने क्षेत्र के वोटों के समीकरण को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. इससे पता चलता है कि स्थानीय जरूरतें पार्टी की वफादारी से ज्यादा बड़ी होती हैं.
मुद्दों पर आधारित राजनीति की नई शुरुआत
ये नेता केंद्र सरकार से नीतिगत मांगों पर बात करते हैं और राज्य प्रशासन से विकास कार्यों पर. इस तरह वे एक नई तरह की तटस्थ राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं. यह तरीका पश्चिम बंगाल की पुरानी पारंपरिक राजनीति को सीधी चुनौती देता है. अब बड़े नेताओं को भी इन सांसदों से खास मुद्दों पर खुलकर बात करनी पड़ रही है. मुर्शिदाबाद के इन सांसदों का यह रुख दिखाता है कि स्थानीय पहचान वाले इलाकों में गठबंधन का गणित इतना आसान नहीं होता.
