Indian Railways Water Alert: इस खबर में जानिए संसद में पेश CAG रिपोर्ट में रेलवे के पानी पर सवाल उठने के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा उठाए गए सख्त कदमों और 20 हजार स्थानों पर लगने वाले नए ‘टैंक टू टैप’ वॉटर फिल्टरेशन सिस्टम के बारे में.

Indian Railways Water Alert: भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों की सेहत और पानी की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ी खबर आई है. संसद में पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में रेलवे के पेयजल पर गंभीर सवाल उठाए गए थे. इस रिपोर्ट के सामने आते ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं. उन्होंने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, सीईओ और सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरे दिन गहन समीक्षा बैठक की. रेल मंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि यात्रियों को तुरंत शुद्ध और सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराया जाए.
लगभग 20 हजार जगहों पर लगेगा नया ‘टैंक टू टैप’ फिल्टरेशन सिस्टम
रेलवे यात्रियों को शुद्ध पेयजल देने के लिए बड़े पैमाने पर काम करने जा रहा है. देशभर के स्टेशनों और वाटर कूलरों के पास करीब 20,000 स्थानों पर नया ‘टैंक टू टैप’ फिल्टरेशन सिस्टम लगाया जाएगा. इसके साथ ही पूरे रेलवे नेटवर्क में पानी को साफ करने और जांचने की आधुनिक व्यवस्था बनेगी. रेलवे स्टेशनों पर बरसों पुरानी और खराब हो चुकी पानी की टंकियों को तुरंत बदला जाएगा. इन नए फिल्टरों के लगने से यात्रियों को सीधे नल से पूरी तरह शुद्ध और ठंडा पानी मिल सकेगा.
पानी के स्रोत और नलों की होगी नियमित जांच और निगरानी
रेलवे अब पानी की गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा. पानी के मुख्य स्रोत से लेकर नलों तक, हर जगह पानी के नमूनों की नियमित जांच की जाएगी. इसके लिए एक केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली और जवाबदेह सिस्टम तैयार किया जाएगा. पूरे देश के रेलवे स्टेशनों पर पानी की सप्लाई पर बोर्ड स्तर से सीधी निगरानी रखी जाएगी. इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि यात्रियों तक पहुँचने वाला पानी हर मानक पर खरा उतरे.
संसद में पेश CAG रिपोर्ट में क्या हुआ था बड़ा खुलासा
आपको बता दें कि 12 अगस्त को संसद में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की एक रिपोर्ट पेश की गई थी. ‘भारतीय रेलवे में गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कई कमियां उजागर हुई थीं. रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि कुछ रेलवे स्टेशनों के पानी में खतरनाक ‘ई. कोलाई’ बैक्टीरिया पाया गया था. सीएजी ने बताया कि रेल मंत्रालय के तय मानकों का पालन अलग-अलग रेलवे जोन ठीक से नहीं कर पा रहे थे. इसी चूक की वजह से यात्रियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी.
यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए बड़ा अभियान
सीएजी की रिपोर्ट को रेल मंत्रालय ने एक चुनौती और सुधार के मौके के रूप में लिया है. मंत्रालय का कहना है कि सीएजी द्वारा बताई गई सभी कमियों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जा रहा है. यात्रियों के सफर को सुगम, सुरक्षित और स्वच्छ बनाना रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है. पानी की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ स्टेशनों पर साफ-सफाई के स्तर को भी सुधारा जा रहा है. अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि काम में ढिलाई बरतने वालों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी.
रेलवे बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों को जिम्मेदारी तय करने के निर्देश
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद इस पूरे प्रोजेक्ट की कमान अपने हाथों में ले ली है. उन्होंने अधिकारियों से साफ कहा है कि इस सुधारात्मक अभियान में किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं होगी. स्थानीय स्टेशन प्रबंधन से लेकर जोन स्तर के बड़े अफसरों तक की जवाबदेही तय की जा रही है. अब से समय-समय पर पानी के सैंपल की रिपोर्ट सीधे उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी. इस पूरे एक्शन प्लान से उम्मीद जताई जा रही है कि बहुत जल्द रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को साफ पेयजल उपलब्ध होने लगेगा.
