Hashim Musa Encounter Budgam: भारतीय सेना ने बडगाम में लश्कर आतंकी और पूर्व SSG कमांडो मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को ढेर किया. पाकिस्तान ने फर्जी हमशक्ल मीडिया के सामने पेश कर झूठ फैलाने की कोशिश की, जिसकी पोल खुल गई.

Hashim Musa Encounter Budgam: दुनिया के सामने अपनी फजीहत कराने और झूठा प्रोपेगैंडा फैलाने के मामले में पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हो गया है. भारतीय सेना ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार आतंकी और पूर्व पाकिस्तानी कमांडो मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मुठभेड़ में ढेर कर दिया था. सेना ने सबूत के तौर पर उसकी तस्वीरें भी जारी की थीं. लेकिन अपनी हार पचा नहीं पा रहा पाकिस्तान गुरुवार को मीडिया के सामने मोहम्मद आसिफ का एक हमशक्ल ले आया. पाकिस्तान ने दावा किया कि आसिफ जिंदा है और उनके सामने खड़ा है. हालांकि कुछ ही घंटों में पाकिस्तान के इस नापाक ड्रामे और फर्जीवाड़े की पूरी पोल खुल गई.
पाकिस्तान के DG ISPR ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रचा नाटक
पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग यानी DG ISPR के लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक व्यक्ति को दुनिया के सामने पेश किया. कैमरे के सामने आकर उस शख्स ने दावा किया कि उसका नाम मोहम्मद आसिफ है. उसने कहा कि वह साल 2000 में पाकिस्तानी सेना में भर्ती हुआ था और 2005 में एसएसजी (SSG) कमांडो बना था. उसने दावा किया कि वह 2023 में हवलदार के पद से रिटायर हुआ था और पूरी तरह जिंदा है. भारत के दावे को झुठलाने के लिए पाकिस्तान की यह एक सोची-समझी साजिश थी.
OSINT और रक्षा विशेषज्ञों ने तुरंत पकड़ ली चोरी
पाकिस्तान का यह ड्रामा ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया. स्वतंत्र ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) विश्लेषकों ने मारे गए आतंकी हाशिम मूसा और पाकिस्तान द्वारा पेश किए गए व्यक्ति के चेहरे की तुलना की. जांच में सामने आया कि दोनों के चेहरे की बनावट में जमीन-आसमान का अंतर था. फर्जी व्यक्ति के कान, नाक का आकार और आंखों की सीध असली आतंकी से बिल्कुल नहीं मिल रही थी. भारतीय सेना के पूर्व अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की इस बचकानी हरकत का मजाक उड़ाया और उसकी पोल खोलकर रख दी.
कौन था ढेर हुआ खूंखार आतंकी मोहम्मद आसिफ?
मारे गए आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा का इतिहास बेहद आपराधिक और खतरनाक रहा था. वह लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर था और पीर पंजाल व कश्मीर घाटी में कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड था. साल 2025 में पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में 26 निर्दोष हिंदू श्रद्धालुओं की जान चली गई थी. उस हमले में शामिल लश्कर के चार मुख्य आतंकियों में से हाशिम मूसा ही आखिरी जिंदा बचा हुआ सदस्य था. भारतीय सेना ने बडगाम एनकाउंटर में उसे ढेर करके पहलगाम हमले के सभी गुनहगारों का हिसाब चुकता कर दिया.
परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा में भी तैनात रह चुका था मूसा
हाशिम मूसा कोई आम आतंकी नहीं था बल्कि वह पाकिस्तान की सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) का एक बेहद ट्रेंड पूर्व कमांडो था. वह खतरनाक जंग लड़ने में माहिर था और इसी वजह से सालों तक घाटी के दुर्गम इलाकों में छिपता फिर रहा था. खबरों के अनुसार साल 2006 से 2008 के बीच वह पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा टीम का हिस्सा भी रह चुका था. इसके अलावा उसने बलूचिस्तान में कई ऑपरेशन्स में भाग लिया था. ऐसे खूंखार आतंकी को मार गिराना भारतीय सेना की आतंकवाद के खिलाफ बहुत बड़ी कामयाबी है.
घाटी में लश्कर के कमर तोड़ नेटवर्क को लगा करारा झटका
भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा हाशिम मूसा को ढेर किए जाने से जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को बहुत बड़ा झटका लगा है. यही वजह है कि अपने ट्रेंड कमांडो और आतंकी की मौत से पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया है. बौखलाहट में उसने दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए फर्जी हमशक्ल खड़ा कर दिया. लेकिन भारत की सतर्कता और विशेषज्ञों के विश्लेषण ने पाकिस्तान की इस नाकाम कोशिश को बेनकाब कर दिया. भारतीय सेना का यह सफल ऑपरेशन दिखाता है कि भारत में आतंकवाद फैलाने वाले किसी भी कसूरवार को बख्शा नहीं जाएगा.
