El Nino Effect Sri Lanka: इस खबर में जानिए भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में अल नीनो के कारण आए भयानक सूखे, पानी की भारी किल्लत और 75 लीटर के आपातकालीन राशनिंग की पूरी कहानी.

El Nino Effect Sri Lanka: प्रशांत महासागर में उठ रही अल नीनो की लहरों का सबसे भयानक रूप अब भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में साफ नजर आने लगा है. वहां मानसून गायब हो गया है और कड़ाके की गर्मी की वजह से नदियाँ और बड़े-बड़े तालाब सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं. हालात इतने ज्यादा बिगड़ गए हैं कि पीने का पानी जुटाना भी लोगों के लिए मुश्किल हो गया है. देश के 72 हजार से ज्यादा लोगों की प्यास बुझाने के लिए अब सरकार को जगह-जगह वॉटर टैंकर भेजने पड़ रहे हैं.
क्या है यह अल नीनो का चक्र
अल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक मौसमी घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से की सतह का पानी असामान्य रूप से बहुत गर्म हो जाता है. पानी गर्म होने की वजह से समुद्र के ऊपर की हवा और मौसम का चक्र पूरी तरह बदल जाता है. इसका सीधा असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है. कहीं रिकॉर्ड तोड़ कड़क बारिश और बाढ़ आ जाती है, तो कहीं महीनों तक बूंद-बूंद पानी के लिए सूखा पड़ जाता है.
दशकों पुराना टूटा रिकॉर्ड और खेती पर मार
श्रीलंका के अधिकारियों का मानना है कि इस बार का सूखा पिछले कई दशकों का सबसे भयानक संकट साबित हो रहा है. देश के सैकड़ों छोटे-बड़े तालाबों में अब केवल 10 फीसदी पानी ही बचा है. इस भारी किल्लत की वजह से सिर्फ पीने का पानी ही नहीं खत्म हुआ है, बल्कि नारियल, हरी सब्जियों और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. खेती चौपट होने से किसानों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
बचाव के लिए सरकार ने जारी किया भारी बजट
सूखे से पैदा हुए हालातों से निपटने के लिए श्रीलंका सरकार ने 4.8 अरब श्रीलंकाई रुपये का फंड तुरंत मंजूर किया है. श्रीलंका के पर्यावरण मंत्री धम्मिका पटाबेंडी ने बताया कि पहले उन्हें लगा था कि अल नीनो का असर नवंबर तक जाकर ज्यादा दिखेगा, लेकिन यह मुसीबत बहुत पहले ही आ खड़ी हुई. फिलहाल सरकार ने सितंबर के तीसरे हफ्ते तक का प्लान तैयार कर लिया है और उन्हें उम्मीद है कि साल के अंत में आने वाला मानसून राहत लेकर आएगा.
दो से तीन दिन में सिर्फ 75 लीटर पानी
जिन इलाकों में सूखा सबसे ज्यादा पड़ा है, वहां सरकार दूसरे हिस्सों से गाड़ियों में पानी भर-भरकर भेज रही है. वॉटर टैंकरों के जरिए हर परिवार को दो से तीन दिन में सिर्फ 75 लीटर पानी ही दिया जा रहा है. लोगों को इसी सीमित पानी में पीने, खाना बनाने और रोजमर्रा के जरूरी काम निपटाने पड़ रहे हैं. पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए लोग मजबूर हो गए हैं.
याला नेशनल पार्क के जानवरों पर भी मंडराया संकट
सूखे की मार सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि जंगलों के बेजुबान जानवरों पर भी बुरी तरह पड़ी है. प्रसिद्ध याला नेशनल पार्क समेत कई अभयारण्यों में पानी खत्म हो गया है. इस पार्क में श्रीलंकाई तेंदुए की दुर्लभ प्रजाति पाई जाती है. वन्यजीव विभाग के महानिदेशक एल. मारासिंघे के अनुसार, अब जंगलों में जानवरों की प्यास बुझाने के लिए सोलर पंपों की मदद से पानी पहुंचाया जा रहा है.
