केंद्र सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम लॉन्च कर दी है. बताया जा रहा है कि यह स्कीम 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगी और 2031 तक चलेगी. इन 5 सालों में 39 लाख करोड़ के फोन उत्पादन का टारगेट रखा गया है.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को पर लॉन्च कर दिया है. उन्होंने कहा कि अभी भारतीय कंपनियों को कई स्तरों पर निर्माण के लिए सपोर्ट करेंगे, जिससे भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग दोगुना करने का टारगेट हासिल किया जा सके. उन्होंने कहा कि मोबाइल के दाम बढ़ रहे हैं, क्योंकि मेमोरी चिप के दाम बढ़ रहे हैं, इसलिए हम मेमोरी चिप के प्रोडक्शन पर ध्यान दे रहे हैं. इसके निर्माण की यूनिट भी स्थापित की जाएंगी.
इससे बढ़ेगा रोजगार
उन्होंने बताया कि एक मोबाइल में एक हजार पार्ट होते हैं और इसका इकोसिस्टम अब भारत में बढ़ गया है और इसमें ज्यादातर एमएसएमई हैं. पहले प्रोजेक्शन बेस्ड था, अब भारतीय डिजाइन और भारत में निर्माण को बढ़ावा देने की स्कीम है. वैष्णव ने बताया कि यह योजना 1 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है. इसमें कई क्षेत्रों पर कार्य प्रगति पर है. इसकी मदद से रोजगार बढ़ेगा और निर्माण क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा.
दुनिया का दूसरा बड़ा मोबाइल निर्माता है भारत
जानकारी के मुताबिक 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का टारगेट भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है. सरकार कंपनियों को उत्पादन और मोबाइल की बिक्री पर 5% तक इंसेंटिव देगी. वैष्णव ने कहा कि भारत मोबाइल फोन का आयातक होने से शुद्ध निर्यातक बन गया है और अब मात्रा के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है. उन्होंने बताया कि जिसमें घरेलू स्तर पर उपयोग किए जाने वाले 99.2% हैंडसेट देश में ही बनते हैं.
60,000 रोजगार सृजित होने की उम्मीद
उन्होंने कहा कि इस योजना का टारगेट अपने कार्यकाल के दौरान लगभग 39 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन करना है. जानकारी के मुताबिक इससे लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण 2014 से सात गुना बढ़ गया है, जबकि निर्यात 11 गुना बढ़ गया है.
