105 साल के बुजुर्ग को सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में बड़ी राहत दी है. साल 1988 के केस में उम्रकैद की सजा पाए रसिक चंद्र मंडल को कोर्ट ने 2024 की जमानत को फाइनल करते हुए दोबारा जेल भेजने से मना कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक केस में दोषी ठहराए गए एक 105 साल के बुजुर्ग को बड़ी राहत दी है. रसिक चंद्र मंडल को कोर्ट ने साल 2024 में दी गई उनकी अंतरिम जमानत को ही अब फाइनल ऑर्डर बना दिया. उनकी उम्र को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर कोई सजा बाकी है तो उसे माफ किया जाता है और मंडल को दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा. आपको बता दें कि मंडल लगभग तीन दशक से ज्यादा समय से इस केस में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे.
साल 1988 में बने थे आरोपी
जानकारी के मुताबिक रसिक चंद्र मंडल का जन्म 1920 में पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हुआ था. साल 1988 में हुई एक हत्या के केस में उन्हें आरोपी बनाया गया था. इसके मामले के लगभग 6 साल बाद साल 1994 में 68 साल की उम्र में उन्हें हत्या का दोषी माना गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद मंडल ने इस फैसले के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. उम्र बढ़ने के साथ उनकी हेल्थ से जुड़ी परेशानियां भी सामने आती रहीं.
मंडल ने की सुप्रीम कोर्ट में अपील
आपको बता दें कि मंडल ने अपनी सजा और दोषी ठहराए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए अपील की थी. साल 2018 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली. साल 2020 में 99 साल की उम्र में मंडल ने समय से पहले रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र और उससे जुड़ी हेल्थ समस्याओं का हवाला दिया. इस मामले में मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था.
कोर्ट ने बंद कर दिया केस
जानकारी के मुताबिक मंडल 29 नवंबर 2024 तक जेल में थे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्र और हेल्थ को देखते हुए उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. इस मामले में निचली अदालत को रिहाई की शर्तें तय करने को कहा गया था. अब शुक्रवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केस को फाइनल तौर पर बंद कर दिया.
