Nepal Tunnel Rescue: नेपाल में बाढ़ के दौरान 9 दिनों तक टनल में फंसे रहे मजदूरों को निकाला गया, जानें इतने दिन भूखे-प्यासे रहने का शरीर पर क्या असर पड़ता है.

Nepal Tunnel Rescue: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के नौ दिन बाद हाइड्रोपावर टनल से दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. दोनों मजदूरों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. नौ दिनों तक ये मजदूर गंदे पानी के बीच बिना भोजन, साफ पानी और कम ऑक्सीजन जैसी खतरनाक स्थिति में फंसे रहे. चारों तरफ अंधेरा और मौत का डर बना हुआ था. इसके बावजूद दोनों जिंदगी की जंग जीत गए. हालांकि अब डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इतने लंबे समय तक टनल में रहने के बाद उनके शरीर और दिमाग पर क्या असर पड़ेगा.
दिमाग और मानसिक सेहत पर गहरा असर
अंधेरी टनल में नौ दिन गुजारना किसी बुरे सपने जैसा होता है. डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे माहौल में इंसान के मन में सबसे बड़ा डर यही रहता है कि वह जिंदा बचेगा या नहीं. लगातार डर और अकेलेपन की वजह से मानसिक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है. इंसान को भ्रम होने लगता है और बोलने में दिक्कत आ सकती है. कई लोग उम्मीद छोड़ देते हैं और डिप्रेशन में चले जाते हैं. ऐसे मरीजों को मानसिक रोग विशेषज्ञ की तुरंत देखभाल की जरूरत होती है.
बिना खाने के शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टर बताते हैं कि भोजन न मिलने पर शरीर खुद को बचाने की कोशिश करता है. शुरुआत में शरीर जमा ग्लूकोज और ग्लाइकोजन से ऊर्जा लेता है. इसके बाद शरीर में मौजूद फैट यानी वसा का इस्तेमाल ईंधन के रूप में होने लगता है. नौ दिन बिना खाए रहने से केवल भूख से मौत भले न हो, लेकिन शरीर में भयंकर कमजोरी और थकान आ जाती है. मांसपेशियों का वजन तेजी से घटने लगता है.
बचाव के तुरंत बाद भारी भोजन देना खतरनाक
कई दिनों तक भूखे-प्यासे रहने के बाद मरीज को तुरंत सामान्य खाना नहीं दिया जा सकता. डॉक्टरों का कहना है कि अचानक भारी भोजन देने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है. इसे मेडिकल भाषा में रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा माना जाता है. इसलिए रेस्क्यू के बाद मरीजों को धीरे-धीरे लिक्विड और सही पोषण विशेषज्ञ की देखरेख में ही भोजन दिया जाता है.
शरीर के मुख्य अंगों की लगातार निगरानी जरूरी
टनल से बाहर आने के बाद भी खतरा पूरी तरह से टलता नहीं है. मरीजों के ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन, किडनी के काम करने की क्षमता और इलेक्ट्रोलाइट स्तर पर लगातार नजर रखनी पड़ती है. टनल के गंदे पानी से फेफड़ों में इन्फेक्शन या त्वचा संबंधी बीमारियां होने का खतरा भी बना रहता है. इसलिए अगले कुछ हफ्ते तक उनका पूरा मेडिकल चेकअप और देखभाल बहुत जरूरी होती है.
