झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत नहीं दी है. यह मामला रांची की PMLA कोर्ट में चल रहे उस केस से जुड़ा है, जिसमें ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए हैं.
झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने ED से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में फिलहाल राहत नहीं दी है. बता दें कि कोर्ट ने ECIR केस नंबर 6/2023 में आगे की कार्रवाई रोकने की उनकी मांग खारिज कर दी है. यह आदेश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने शुक्रवार को दिया. हेमंत सोरेन ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि उनके खिलाफ केस आगे बढ़ाने से पहले जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं ली गई है.
उस दौरान सीएम सोरेन का कहना था कि इस मामले में पुराने कानून यानी CRPC की धारा 197 के तहत मंजूरी जरूरी है. वहीं ED ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मौजूदा मामले में BNS की धारा 218 लागू होगी और 120 दिन में फैसला नहीं होने पर मंजूरी को मिली हुई माना जा सकता है.
मामले में कोर्ट ने किया इनकार
मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि इस समय सिर्फ मंजूरी नहीं मिलने के आधार पर पूरे ट्रायल को रोकना सही नहीं होगा. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि अभी यह तय करना जल्दबाजी होगी कि हेमंत सोरेन के खिलाफ लगाए गए आरोप उनके सरकारी काम का हिस्सा थे या नहीं. इस सवाल पर ट्रायल के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज और सबूत महत्वपूर्ण होंगे.
19 सितंबर को आरोप तय करने की तारीख
आपको बता दें कि सोरेन की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि ED केस में 19 सितंबर 2026 को आरोप तय करने की तारीख रखी गई है. इसी वजह से उन्होंने हाईकोर्ट से तुरंत राहत की मांग की थी. अब इसमें हाईकोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियां सिर्फ आगे की कार्रवाई पर रोक की अर्जी तक सीमित हैं.
8 जून को किया था खारिज
आपको बता दें कि मामला रांची की विशेष PMLA अदालत में चल रहे उस केस से जुड़ा है. इसमें ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए हैं. सोरेन की डिस्चार्ज अर्जी को विशेष अदालत ने 8 जून को खारिज किया था, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था.
