Republic day 2026: देशभर में 77वें गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस अवसर पर देशभर में ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किए गए. सोमवार को दिल्ली के केशवकुंज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने तिरंगा फहराया. देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी. जिसके बाद उन्होंने जनसमुदाय को संबोधित किया.
राष्ट्रधर्म का पालन करें
दत्तात्रेय होसबाले ने इस मौके पर कहा कि आज हमें अपने जीवन में भारत के चिरंतन आध्यात्मिक मूल्यों को, नागरिक कर्तव्यों को, अपने राष्ट्रधर्म को पालन करने के लिए संकल्प लेना चाहिए. हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने संविधान की सुरक्षा, भारत की एकात्मकता-एकता की सुरक्षा, भारत की सीमाओं की सुरक्षा करें.
दिया महाभारत काल का उदाहरण
इस मौके पर उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि इस साल गणतंत्र दिवस भीष्म अष्टमी के पावन अवसर के साथ आया है, जो इसे और भी खास बनाता है. कहा कि हमें महाभारत के भीष्म पितामह के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए. भीष्म पितामह ने राजधर्म, प्रजाधर्म और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी प्रासंगिक है.
भारत की आत्मा सत्य और धर्म पर आधारित –
श्री होसबाले जी ने तिरंगे, अशोक चक्र और राष्ट्रीय आदर्श वाक्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आत्मा सत्य और धर्म पर आधारित है. उन्होंने “सत्यमेव जयते” और “यतो धर्मस्ततो जयः” को भारतीय शासन, न्याय व्यवस्था और लोकतंत्र की मूल भावना बताया. उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की रक्षा, भारत के तिरंगे और राष्ट्रीय एकात्मकता की रक्षा, यह सब सत्य और धर्म के आधार पर है.
जो बात भीष्म ने बताई थीं, वही बात भारत की सनातन परंपरा है. वही बात आधुनिक युग में भी प्रासंगिक है और विश्व के लिए एक श्रेष्ठ उदाहरण है. इसलिए हमे भारत के गणतंत्र की रक्षा करने के लिए समाज के प्रति प्रीत, प्रेम, संवेदना, हमारे दुर्बल लोगों के प्रति स्नेह और आत्मीयता, उनकी सेवा की भावना रखनी है.
संघ के स्वयंसेवकों ने की साधना
श्री होसबाले जी ने कहा कि भारत के हर क्षेत्र में, प्रत्येक आयाम में जीवन को विकसित करने के लिए अपने को हर क्षण, हर कण प्रयत्न करना चाहिए. संघ के स्वयंसेवकों ने इसी साधना को पिछले सौ सालों से किया है. भारत के गणतंत्र की रक्षा, भारत के समाज की सेवा, भारत के राष्ट्र धर्म को ज्ञात करके उसकी प्रेरणा से आगे बढ़ना. आज का दिन भी हमारे लिए अत्यंत प्रासंगिक संदेश है. इस बात को हम सभी न केवल याद रखें, इसके लिए अपने जीवन में सतत सक्रिय और सजग रहें.
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