UP Defence Industrial Corridor: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी तकनीकी कुशलता साबित करने वाले काउंटर ड्रोन ”द्रोणम” का निर्माण झांसी डिफेंस कॉरिडोर में होगा. ब्लैक गन के नाम से चर्चित इस ड्रोन को हाल में गणतंत्र दिवस परेड में भी शामिल किया गया था. पहले चरण में लगभग 150 करोड़ रुपये के निवेश के साथ शुरुआत होगी. यूपी डिफेन्स इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर ने वर्ष 2026 में दो रक्षा विनिर्माण कंपनियों को जमीन का आवंटन किया. झाँसी नोड में गुरूत्व सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को 10 हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया
दूसरा आवंटन नेक्सा मुंबई को लखनऊ नोड में 0.5 हेक्टेयर भूमि के रूप में किया गया है.
द्रोणम क्या है? कैसे करता है काम
यह एक अत्याधुनिक ‘काउंटर ड्रोन सिस्टम’ है जो दुश्मन के ड्रोन का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और फिर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है. द्रोणम दो तरह से काम करता है.
सॉफ्ट किल : यह दुश्मन के ड्रोन और उसके कंट्रोलर के बीच के रेडियो सिग्नल या GPS लिंक को जाम कर देता है. इससे ड्रोन या तो वापस लौट जाता है या वहीं गिर जाता है.
हार्ड किल: उन्नत वर्जन में इसमें लेजर-आधारित तकनीक का विकल्प भी होता है, जो सीधे ड्रोन को हवा में ही जलाकर नष्ट कर सकता है.
निवेश और रोजगार
₹150 करोड़ के इस निवेश से बुंदेलखंड क्षेत्र में उच्च तकनीक वाले रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे. कंपनी के जरिये लगभग 380 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.
रणनीतिक महत्व
यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगा, जो रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगा. झांसी की डिफेंस कॉरिडोर में मौजूदगी इसे सेना और वायु सेना के लिए लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है
दुश्मन का हमला बेअसर करती है द्रोणम
द्रोणम में ऐसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो दुश्मन ड्रोन को कबाड़ बना देता है. यह प्रणाली 1 से 8 किलोमीटर की दूरी तक के ड्रोन को पहचानने और उन्हें जाम करके निष्क्रिय करने में सक्षम है. यानी ये दुश्मन ड्रोन के हार्डवेयर को बेकार कर देती है. द्रोणम को अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है.
रायफल की तरह कर सकते हैं इस्तेमाल
द्रोणम दुश्मन ड्रोन को कबाड़ बना देता है. द्रोणम को रायफल की तरह हाथ में पकड़कर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे बैगपैक की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. 8 किमी तक ड्रोन को पहचान निष्क्रिय करने की है क्षमता. इसके अलावा किसी वाहन या स्थायी जगह पर लगाया जा सकता है, जो चारों दिशाओं में निगरानी करता है।
निश्चित रूप से! ‘द्रोणम’ काउंटर-ड्रोन सिस्टम भारत की सीमा सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है. इसकी तकनीकी खूबियां इसे दुनिया के बेहतरीन डिफेंस सिस्टम्स की श्रेणी में खड़ा करती हैं.
झांसी कॉरिडोर में इसका महत्व
झांसी में इसके बनने से भारतीय सेना को विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ₹150 करोड़ के निवेश से बन रही यह यूनिट प्रतिवर्ष सैकड़ों की संख्या में ऐसे सिस्टम तैयार कर सकेगी, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है.
