Iran strategic missile exercise: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज में मिसाइल अभ्यास कर जहाजों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी और दुनिया को तेल सप्लाई रोक सकने का संदेश दिया. उसी समय जिनेवा में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ उसके परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत भी चलती रही है.

Iran strategic missile exercise: मंगलवार को ईरान ने दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया. एक ही समय पर दो अलग रास्तों पर कदम उठाए गए. एक तरफ संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी. दूसरी तरफ समुद्र में बड़ी सैन्य कार्रवाई की गई. इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होरमुज में लाइव फायरिंग अभ्यास किया गया और कुछ समय के लिए जहाजों की आवाजाही रोक दी गई. यह कार्रवाई ऐसे वक्त में हुई जब ईरान की टीम जिनेवा में बातचीत कर रही थी. ईरान का साफ संदेश था कि वह जब चाहे इस समुद्री रास्ते को बंद कर सकता है. यह तरीका ईरान की पुरानी नीति जैसा माना जा रहा है. यानी बातचीत भी और दबाव भी.
स्ट्रेट ऑफ होरमुज को दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्ग माना जाता है. यह रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यह समुद्री गलियारा ईरान और ओमान के बीच स्थित है. इसकी चौड़ाई सबसे संकरे हिस्से में करीब तैंतीस से चौंतीस किलोमीटर है. लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा है. दुनिया में होने वाली कुल तेल आपूर्ति का करीब बीस प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. रोजाना लगभग दो करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी समुद्री रास्ते से भेजे जाते हैं. ईरान पहले भी कई बार कह चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह इस रास्ते को बंद कर देगा. इस बार की फायरिंग से उसने यह दिखाने की कोशिश की कि उसके पास ऐसा करने की क्षमता मौजूद है.
ईरानी सरकारी माध्यमों के अनुसार बातचीत के लगभग तीन घंटे बाद यह दौर खत्म हुआ. बातचीत के समय ही यह घोषणा कर दी गई थी कि समुद्री इलाके में सैन्य अभ्यास किया जा रहा है. जैसे ही वार्ता शुरू हुई. ईरानी मीडिया ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होरमुज की दिशा में मिसाइलें दागी गई हैं. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम न्यूज एजेंसी ने कहा कि देश के अंदर और तटीय इलाकों से दागी गई मिसाइलों ने अपने तय किए गए लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया. यह भी कहा गया कि यह पहला मौका है जब ईरान ने इस जलमार्ग को औपचारिक रूप से बंद रखने की घोषणा की है. इससे पहले अभ्यास तो हुए थे. लेकिन बंद करने का ऐलान नहीं किया गया था.
ईरान ने साफ किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत सिर्फ उसके परमाणु कार्यक्रम तक ही सीमित रहेगी. देश की अंदरूनी नीतियों या हाल के प्रदर्शनों पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी. इसी बीच अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि अगर ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक नहीं लगाई तो ताकत का इस्तेमाल किया जा सकता है. ईरान ने भी जवाब में कहा है कि किसी भी हमले की स्थिति में वह सीधे जवाब देगा. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने बताया कि बातचीत में प्रतिबंध हटाने और परमाणु मामलों से जुड़ी कुछ तकनीकी जानकारियों पर चर्चा हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी है. फिर भी बातचीत जारी रखने की जरूरत है.
ईरान की तरफ से बातचीत की अगुआई विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं. वह जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी संस्था International Atomic Energy Agency के प्रमुख से भी मुलाकात कर चुके हैं. अराघची ने कहा है कि ईरान एक बराबरी पर आधारित समझौते के इरादे से आया है. लेकिन धमकी के आगे झुकने का सवाल ही नहीं है. उधर ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस प्रक्रिया में किसी न किसी रूप में शामिल हो सकते हैं. उनका कहना है कि उन्हें लगता है कि ईरान समझौता चाहता है. क्योंकि बिना समझौते की स्थिति के नतीजे दोनों पक्षों के लिए गंभीर हो सकते हैं.
