bangladesh politics crisis: बांग्लादेश में सत्ता संभालते ही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के बीच जुलाई चार्टर को लेकर टकराव शुरू हो गया है. जमात और उसकी सहयोगी पार्टी ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ सड़क पर आंदोलन की चेतावनी दी है.

bangladesh politics crisis: मंगलवार को बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा तनाव देखने को मिला. एक ओर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी. वहीं दूसरी ओर चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश पहले दिन से ही आक्रामक रुख में नजर आई. पार्टी के नेता तारिक रहमान के नेतृत्व में पार्टी के नवनिर्वाचित सदस्यों ने संसद सदस्य के रूप में शपथ तो ली. लेकिन संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेने से साफ इनकार कर दिया. इसी फैसले से नाराज जमात-ए-इस्लामी और उसकी सहयोगी नेशनल सिटिजन पार्टी ने सरकार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया. दोनों दलों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ कदम बताया.
जमात नेता शफीकुल इस्लाम मसूद ने बताया कि यह फैसला पार्टी की संसदीय बैठक में लिया गया था. उनका कहना था कि जुलाई चार्टर से जुड़ी संविधान सुधार परिषद के लिए अलग शपथ जरूरी है. उन्होंने कहा कि जब इस परिषद का गठन होना है तो उसके लिए भी शपथ होनी चाहिए. लेकिन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने इससे इनकार कर दिया. इसी कारण पार्टी ने शपथ ग्रहण समारोह में भाग नहीं लिया. जमात और उसकी सहयोगी पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि यह विरोध केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा. जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जाएगा.
बारह फरवरी को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने दो सौ बारह सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी समेत ग्यारह सहयोगी दलों ने मिलकर सत्तर सात सीटें जीती थीं. इसी दिन जुलाई चार्टर को लेकर जनमत संग्रह भी कराया गया था. जिसमें बासठ प्रतिशत लोगों ने समर्थन दिया था. जुलाई चार्टर का मकसद संसद को एक सौ अस्सी दिनों के लिए संविधान सभा में बदलना है. ताकि संविधान. लोकतांत्रिक संस्थाओं और शासन प्रणाली में सुधार किए जा सकें. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का कहना है कि अंतिम दस्तावेज में कई नई बातें जोड़ दी गईं. जिनसे वह सहमत नहीं है.
यह पूरा विवाद उस अंतरिम शासन से जुड़ा है. जिसकी अगुवाई मोहम्मद यूनुस कर रहे थे. जुलाई चार्टर सत्रह अक्टूबर दो हजार पच्चीस को सभी दलों से बातचीत के बाद अपनाया गया था. यह दस्तावेज उन सिफारिशों पर आधारित है जो पांच अगस्त दो हजार चौबीस को शेख हसीना की सरकार हटने के बाद सामने आई थीं. उस समय पूरे देश में बड़े आंदोलन हुए थे. जमात और उसकी सहयोगी पार्टी पहले सुधारों की मांग कर रही थीं. जबकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी पहले चुनाव कराने के पक्ष में थी. अंत में दोनों काम एक साथ कराए गए.
अब शपथ के साथ ही राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है. जमात और नेशनल सिटिजन पार्टी ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी पर फासीवादी रवैये का आरोप लगाया है. जमात महासचिव मिया गोलाम परवार ने कहा कि कथित चुनावी गड़बड़ी. चुनाव के बाद हिंसा और महिलाओं के खिलाफ घटनाओं से लोगों का भरोसा टूट गया है. उन्होंने नोआखाली में पार्टी समर्थक महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का भी जिक्र किया. नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता नासिरुद्दीन पटवारी ने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ सड़क पर आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि वे तारिक रहमान को जवाबदेह ठहराएंगे और अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते.
