crude oil price hike impact on india: पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल के दाम 30% बढ़ गए हैं, जिससे भारतीय तेल कंपनियों को रोजाना 2,000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है. डीजल पर प्रति लीटर 45 रुपये के नुकसान के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है.

crude oil price hike impact on india: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. इसकी वजह से देश को हर दिन भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. खबरों के अनुसार तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं. भारत अपनी जरूरत का लगभग पचासी प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब बाहर से आने वाला तेल महंगा होता है तो उसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
पिछले लगभग पंद्रह दिनों में कच्चे तेल की कीमत में काफी तेज बढ़ोतरी देखी गई है. बताया जा रहा है कि इस दौरान तेल के दाम तीस प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ गए हैं. तेल महंगा होने से आयात पर खर्च बढ़ जाता है. साथ ही महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो जाता है. परिवहन और कई उद्योग तेल पर निर्भर रहते हैं. इसलिए कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से कई चीजों की लागत भी बढ़ने लगती है. इसी वजह से सरकार और तेल कंपनियों की चिंता बढ़ती जा रही है.
इसी बीच एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल बेचने में भारी घाटा हो रहा है. देश की प्रमुख कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि मौजूदा हालात में इन कंपनियों को हर दिन करीब दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसका बड़ा कारण यह है कि तेल की खरीद महंगी हो गई है लेकिन जनता के लिए कीमतें अभी स्थिर रखी गई हैं.
रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों को डीजल बेचने में सबसे ज्यादा घाटा हो रहा है. एक लीटर डीजल पर लगभग पैंतालीस रुपये तक का नुकसान बताया जा रहा है. वहीं पेट्रोल पर भी करीब बीस रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है. कुल नुकसान में से लगभग सोलह सौ पचास करोड़ रुपये का बोझ डीजल से जुड़ा है. जबकि करीब तीन सौ पचास करोड़ रुपये का नुकसान पेट्रोल से हो रहा है. यानी डीजल की बिक्री कंपनियों के लिए ज्यादा भारी पड़ रही है.
इस स्थिति के पीछे एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव माना जा रहा है. इस कारण तेल लाने वाले जहाजों का खर्च भी बढ़ गया है. समुद्री परिवहन और बीमा का खर्च पहले से अधिक हो गया है. इससे भारत के लिए तेल खरीदना और महंगा हो गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल कंपनियां खुद नुकसान सहकर कीमतों को स्थिर रख रही हैं. लेकिन अगर कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहे तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसके साथ ही गैस की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
