donald trump allows russian oil sale: मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने समुद्र में खड़े रूसी तेल टैंकरों को अस्थायी रूप से बिक्री की अनुमति दे दी है. इस फैसले से भारत और चीन जैसे एशियाई देशों को करीब 1.9 करोड़ बैरल सस्ता कच्चा तेल खरीदने का मौका मिलेगा.

donald trump allows russian oil sale: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के माहौल ने दुनिया के तेल बाजार में हलचल मचा दी है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली गई हैं. कई जगह तेल का दाम एक सौ डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गया है. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने बाजार की दिशा बदल दी है. उन्होंने समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल को अस्थायी रूप से वैश्विक बाजार में बेचने की अनुमति दे दी है. इस फैसले से कई देशों को अचानक सस्ता तेल खरीदने का मौका मिल गया है.
बताया जा रहा है कि एशिया के समुद्री क्षेत्र में कई रूसी तेल टैंकर पिछले कई महीनों से खड़े हुए हैं. इन टैंकरों में भारी मात्रा में कच्चा तेल और ईंधन भरा हुआ है. पहले इनकी बिक्री में कई तरह की बाधाएं थीं. लेकिन अब अमेरिकी छूट मिलने के बाद एशिया के देश इन टैंकरों से तेल खरीद सकते हैं. जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले आंकड़ों के अनुसार इन टैंकरों में करीब एक करोड़ नब्बे लाख बैरल कच्चा तेल मौजूद है. इसके अलावा लगभग तीन लाख दस हजार टन परिष्कृत पेट्रोलियम पदार्थ भी भरे हुए हैं.
इन परिष्कृत पदार्थों में मुख्य रूप से नाफ्था शामिल है. इसका उपयोग प्लास्टिक और कई अन्य उत्पाद बनाने में किया जाता है. कुछ टैंकरों में डीजल भी मौजूद है. खबरों के अनुसार लगभग पच्चीस जहाज ऐसे हैं जिनमें कच्चा तेल भरा हुआ है. इनमें रूस का प्रसिद्ध सोकोल किस्म का तेल भी शामिल है. कुछ जहाज चीन के पास समुद्र में खड़े हैं. वहीं अरब सागर में भी कई टैंकर मौजूद हैं जिनमें यूराल मिश्रण का कच्चा तेल भरा हुआ बताया जा रहा है. ये जहाज लंबे समय से खरीदार का इंतजार कर रहे थे.
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति ने भी बाजार में तनाव बढ़ा दिया है. ईरान ने दबाव बनाने के लिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है. यह रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. दुनिया के कुल तेल कारोबार का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. इसके बंद होने से तेल और गैस की आपूर्ति में बड़ी रुकावट आ सकती है. इसी वजह से कई देशों में ऊर्जा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का यह फैसला कई देशों के लिए राहत लेकर आया है. इससे उन देशों को समय मिल गया है जो मध्य पूर्व से मिलने वाली आपूर्ति में आई रुकावट से परेशान हैं. अब जो भी तेल बाजार में उपलब्ध होगा, देश उसे खरीदने की कोशिश करेंगे. फिलहाल दुनिया के कई जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास फंसे हुए हैं. ऐसे में समुद्र में खड़े रूसी टैंकर अचानक महत्वपूर्ण बन गए हैं और कई देशों की नजर अब उन्हीं पर टिक गई है.
