india usa trade deal: अमेरिका द्वारा औद्योगिक उत्पादन की जांच शुरू करने के बाद भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता खटाई में पड़ता दिख रहा है. भारत ने सतर्क रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वह पूरी स्पष्टता के बिना किसी भी शर्त पर हस्ताक्षर नहीं करेगा.

india usa trade deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर इन दिनों नई चर्चा शुरू हो गई है. एक अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्था की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई है. इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका की ओर से शुरू की गई नई जांच बताई जा रही है. यह जांच अमेरिका के उद्योग क्षेत्र से जुड़ी है. बताया जा रहा है कि इस जांच में भारत सहित सोलह देशों को शामिल किया गया है. इसी कारण दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर स्थिति पहले जैसी आसान नहीं रह गई है.
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका का कहना है कि कुछ देशों में जरूरत से ज्यादा औद्योगिक उत्पादन हो रहा है. इसके बाद वे देश अपने सामान को कम कीमत पर विदेशों में बेचते हैं. इससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होने का दावा किया गया है. इसी कारण अमेरिका ने जांच शुरू की है. इस जांच में कई तरह के उद्योगों को शामिल किया गया है. इनमें इस्पात, रसायन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक सामान और सौर ऊर्जा से जुड़े उपकरणों का क्षेत्र शामिल बताया जा रहा है. जांच का मकसद यह देखना है कि कहीं विदेशी कंपनियां अनुचित तरीके से बाजार पर कब्जा तो नहीं कर रही हैं.
अमेरिका के कानून के अनुसार यदि किसी देश पर अनुचित व्यापार का आरोप साबित हो जाता है तो उसके खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं. ऐसे में उस देश के सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है या फिर व्यापार से जुड़े अन्य प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं. यही कारण है कि इस जांच को गंभीर माना जा रहा है. जिन सोलह देशों पर नजर रखी जा रही है, उनमें भारत का नाम भी शामिल बताया गया है. हालांकि भारत की ओर से कहा गया है कि अभी इस विषय को लेकर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं है.
भारत के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. मंत्रालय के अनुसार दोनों देश ऐसा समझौता चाहते हैं जिससे दोनों को फायदा हो. इसलिए बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. कुछ अधिकारियों का यह भी कहना है कि भारत किसी भी समझौते पर जल्दबाजी में हस्ताक्षर नहीं करना चाहता. भारत चाहता है कि पहले सभी शर्तें साफ हो जाएं और दोनों देशों के हितों का ठीक तरह से ध्यान रखा जाए.
शुरुआत में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इस समझौते के बाद कुछ शुल्क कम किए जा सकते हैं. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ सकता था. भारत को भी उम्मीद थी कि भविष्य में शुल्क से जुड़े नियमों को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी. लेकिन हाल के घटनाक्रम के बाद भारत ने थोड़ा सतर्क रुख अपना लिया है. अब भारत की नीति यह है कि पहले अमेरिका की नई व्यापार नीति और शुल्क व्यवस्था को ध्यान से देखा जाए. उसके बाद ही आगे का फैसला लिया जाए. इससे साफ है कि बातचीत अभी जारी है, लेकिन अंतिम समझौते में थोड़ा समय लग सकता है.
