why indian rupee all time: विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और $150 के पार पहुंचे कच्चे तेल के कारण रुपया ₹93.71 के अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ. RBI द्वारा $15 अरब खर्च करने के बावजूद बाजार का दबाव बना हुआ है और एक्सपर्ट्स ने रुपये के ₹100 के स्तर तक गिरने की आशंका जताई है.

why indian rupee all time: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया इन दिनों लगातार कमजोर होता जा रहा है. हाल ही में इसमें बड़ी गिरावट देखी गई. एक दिन में ही रुपया 108 पैसे टूटकर 93.71 के स्तर पर पहुंच गया. यह अब तक का सबसे निचला स्तर है. पहली बार रुपया 93 के पार गया है. मार्च महीने में ही रुपये की कीमत करीब 2 फीसदी गिर चुकी है. ऐसे में एक्सपर्ट्स अब चिंता जता रहे हैं कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो रुपया 100 के स्तर तक भी पहुंच सकता है.
इस गिरावट को रोकने के लिए Reserve Bank of India यानी RBI लगातार सक्रिय है. केंद्रीय बैंक बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है. इसके अलावा फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट और दूसरे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि मार्च में RBI ने 15 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं. फिर भी बाजार का दबाव इतना ज्यादा है कि रुपये को संभालना मुश्किल हो रहा है.
रुपये में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे पहला कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली है. मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी रकम निकाल ली. इससे डॉलर की मांग बढ़ गई. दूसरा कारण कच्चे तेल की कीमत है, जो 150 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, इसलिए इसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है.
तीसरा कारण पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध है. इस तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की ओर जा रहे हैं. चौथा कारण बढ़ता चालू खाता घाटा है. महंगे तेल और कमजोर व्यापार आंकड़ों से देश का खर्च बढ़ रहा है. पांचवां कारण यह है कि RBI बहुत ज्यादा हस्तक्षेप नहीं कर रहा, ताकि अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रख सके. इन सभी कारणों से रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है.
रुपये की गिरावट का असर आम लोगों पर भी पड़ता है. पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है. विदेश से आने वाले सामान जैसे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमत बढ़ सकती है. कंपनियों की लागत बढ़ेगी और मुनाफा घट सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो रुपया 94-95 तक और गिर सकता है. लंबे समय में 100 के स्तर तक जाने का खतरा भी बना हुआ है.
