ghost murmur technology: अमेरिकी एजेंसियों ने ‘Ghost Murmur’ नामक एक अत्याधुनिक तकनीक के जरिए दुश्मन के इलाके में छिपे अपने पायलट की जान बचाई है, जो 64 किमी दूर से भी इंसान के दिल की धड़कन और उसकी विद्युत-चुंबकीय तरंगों को पहचानने में सक्षम है. यह तकनीक सिंथेटिक डायमंड सेंसर पर आधारित है और भविष्य में जासूसी व बचाव अभियानों के लिए एक क्रांतिकारी खोज मानी जा रही है.

ghost murmur technology: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के दौरान एक बेहद अनोखी तकनीक की चर्चा सामने आई है. बताया जा रहा है कि एक अमेरिकी पायलट को खोजने और बचाने के लिए खास जासूसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया. इस तकनीक का नाम ‘घोस्ट मरमर’ बताया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक इस तकनीक की मदद से करीब 64 किलोमीटर दूर से भी एक इंसान की दिल की धड़कन तक पकड़ी जा सकती है. इसी तकनीक के सहारे एक अमेरिकी पायलट की लोकेशन का पता लगाया गया. वह पायलट दुश्मन इलाके में फंस गया था और अपनी जान बचाने के लिए पहाड़ की एक दरार में छिपा हुआ था.
जानकारी के अनुसार पायलट करीब 48 घंटे तक पहाड़ी इलाके में छिपा रहा. उस दौरान दुश्मन सैनिक लगातार उसकी तलाश कर रहे थे. इतना ही नहीं, पायलट को पकड़ने के लिए इनाम भी घोषित कर दिया गया था. अमेरिकी एजेंसियों को यह अंदाजा था कि पायलट पहाड़ों के बीच कहीं मौजूद है. लेकिन उसकी सही जगह का पता नहीं चल पा रहा था. तभी इस नई तकनीक की मदद ली गई. इस सिस्टम ने काफी दूर से पायलट की दिल की धड़कन को पहचान लिया. इसके बाद उसकी सटीक लोकेशन का पता चल गया और बचाव अभियान शुरू किया गया.
बताया जाता है कि यह तकनीक बेहद आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांत पर काम करती है. इसमें इंसान के दिल से निकलने वाली बेहद हल्की विद्युत और चुंबकीय तरंगों को पकड़ा जाता है. खास सेंसर इन संकेतों को बहुत दूर से भी पहचान लेते हैं. इसके बाद कंप्यूटर सिस्टम इन संकेतों को बाकी आवाजों और हलचलों से अलग कर देता है. आसान शब्दों में समझें तो जैसे किसी बड़े शोर में भी किसी एक व्यक्ति की आवाज पहचान ली जाए. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां आवाज नहीं बल्कि दिल की धड़कन को पकड़ा जाता है.
इस तकनीक को एक अमेरिकी रक्षा कंपनी ने विकसित किया है. इसे पहले हेलीकॉप्टर पर परीक्षण के तौर पर लगाया गया था. अब इसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में लगाने की तैयारी चल रही है. इसमें खास तरह के सेंसर और सिंथेटिक डायमंड से बने सूक्ष्म उपकरण लगाए जाते हैं. ये उपकरण इतने संवेदनशील होते हैं कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले हार्ट मॉनिटर से भी ज्यादा सटीक माने जाते हैं. इसी वजह से दूर से भी इंसान की मौजूदगी का पता लगाना संभव हो पाता है.
इस तकनीक को लेकर कई विशेषज्ञ इसे भविष्य की बड़ी खोज मान रहे हैं. इससे सेना को खोज और बचाव अभियान में बड़ी मदद मिल सकती है. आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन और जासूसी मिशनों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि इतनी शक्तिशाली तकनीक से गोपनीयता से जुड़ी नई चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं. अगर भविष्य में यह तकनीक ज्यादा देशों के पास पहुंच गई तो इसका इस्तेमाल निगरानी के लिए भी हो सकता है. फिलहाल यह तकनीक बेहद सीमित और गुप्त मानी जा रही है.
