Champat Rai Allegations: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री चंपत राय ने एसआईटी के सामने ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और बैंक पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर सफाई कर्मचारियों से पैसे गिनवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं.

Champat Rai Allegations: अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. इस पूरे मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के सामने ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री चंपत राय ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. चंपत राय द्वारा दिए गए जवाब अब सबके सामने आ चुके हैं, जिसमें उन्होंने ट्रस्ट के ही एक अन्य सदस्य अनिल मिश्रा पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. इसके साथ ही उन्होंने बैंक के साथ हुए समझौतों और सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
मेरी जानकारी के बिना हुआ बैंक से गुप्त समझौता
चंपत राय ने एसआईटी (SIT) को दिए अपने बयान में साफ कहा है कि बैंक के साथ जो भी समझौता (MOU) हुआ था, उस पर उनके दस्तखत होने बेहद जरूरी थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे एग्रीमेंट में बहुत बड़ी गड़बड़ी की गई है. चंपत राय का कहना है कि उनकी जानकारी के बिना ही बैंक के साथ यह गुप्त समझौता कर लिया गया. उन्होंने बैंक की तरफ से पैसों की गिनती के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों पर भी पूरी तरह असहमति जताई है और बैंक के काम करने के तरीके को कटघरे में खड़ा किया है.
दस्तखत किसी और के और जानकारी मिली सालों बाद
ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री ने कागजी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि 6 फरवरी 2025 के जिस नियम कायदे वाले पत्र का हवाला दिया जा रहा है, उस पर उनके साइन हैं ही नहीं. इस पत्र के बारे में उन्हें बहुत बाद में, यानी 13 जून 2026 को पता चला. चंपत राय ने दावा किया कि अगस्त 2020 से लेकर जून 2026 तक बैंक के साथ जितने भी पेपर साइन हुए, उन सब पर उनके असली दस्तखत मौजूद हैं. लेकिन 6 फरवरी 2025 वाले इस खास पत्र पर उनके हस्ताक्षर न होना कई बड़े संदेह पैदा करता है.
बिना जेब के कपड़ों वाले सुरक्षा नियम की उड़ी धज्जियां
चंपत राय ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि राम मंदिर के चढ़ावे की गिनती के दौरान सुरक्षा के तय मानकों का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया. नियमों के मुताबिक, जो भी कर्मचारी पैसों की गिनती के काम में लगाए जाते हैं, उन्हें बिना जेब वाले कपड़े पहनने होते हैं ताकि कोई पैसा छुपा न सके. लेकिन बैंक ने इस जरूरी नियम की जमकर अनदेखी की. इसके अलावा सुरक्षा से जुड़े कई दूसरे जरूरी नियमों को भी ताक पर रख दिया गया, जिससे चोरी की आशंका और बढ़ गई.
हाउसकीपिंग स्टाफ से करवाई रामलला के पैसों की गिनती
चंपत राय ने अपने बयान में सबसे गंभीर आपत्ति बैंक द्वारा रखे गए स्टाफ को लेकर जताई है. उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील और पवित्र काम के लिए बैंक ने हाउसकीपिंग स्टाफ (सफाई कर्मियों) को पैसे गिनने के काम पर लगा दिया. जबकि ऐसे कामों के लिए खास तौर पर तय किए गए ईमानदार और पेशेवर लोगों को ही लगाया जाना चाहिए था. चंपत राय ने अंदेशा जताया कि या तो बैंक के बड़े अफसरों को इन नियमों की समझ नहीं थी, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया गया. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 9 फरवरी 2024 के समझौते के तहत गिनती वाले कमरे में सीसीटीवी कैमरे और लोहे के मजबूत दरवाजे होने चाहिए थे, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ नहीं मिला. अब उन्होंने बैंक अधिकारियों से इस पर लिखित सफाई मांगी है.
